जनगणना 2026 फेज एक में पूछे जाएंगे 33 सवाल

Updated on 2026-01-23T15:41:27+05:30

जनगणना 2026 फेज एक में पूछे जाएंगे 33 सवाल

जनगणना 2026 फेज एक में पूछे जाएंगे 33 सवाल

केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2026 को लेकर पहले चरण की तैयारियों से जुड़ी अहम जानकारी सार्वजनिक की है। बताया जा रहा है कि फेज एक में देशभर के नागरिकों से आवास, परिवार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। यह चरण हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के रूप में जाना जाता है, जिसमें किसी भी व्यक्ति की जाति या व्यक्तिगत आय से जुड़े सवाल शामिल नहीं होंगे।

सूत्रों के अनुसार, पहले चरण में गणनाकर्मी घरों की स्थिति, निर्माण के प्रकार और उपयोग से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे। इसमें यह पूछा जाएगा कि मकान पक्का है या कच्चा, उसमें कितने कमरे हैं और परिवार उसमें कब से रह रहा है। इसके साथ ही घर में बिजली, पानी, शौचालय, रसोई गैस और इंटरनेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, यह भी दर्ज किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि जनगणना फेज एक में परिवार के मुखिया का नाम, परिवार के सदस्यों की संख्या और आवास का स्वामित्व किसके पास है, जैसे सवाल भी शामिल हैं। इसके अलावा यह जानकारी भी ली जाएगी कि मकान किराए का है या स्वयं का, और यदि किराए का है तो किस प्रकार का है। वहीं दूसरी ओर, घर में उपयोग होने वाले ईंधन, पीने के पानी के स्रोत और अपशिष्ट निपटान व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सूची में रखे गए हैं।

इस बीच सरकार का कहना है कि जनगणना का यह चरण नीति निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। प्रशासन के अनुसार, इन्हीं आंकड़ों के आधार पर शहरी और ग्रामीण विकास, आवास योजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़ी नीतियां तय की जाती हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा संग्रह पर भी जोर दिया जा रहा है ताकि प्रक्रिया अधिक सटीक और तेज हो सके।

वहीं दूसरी ओर, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान दी गई जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत पहचान या विवरण सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

बताया जा रहा है कि फेज एक के बाद जनगणना का दूसरा चरण आयोजित किया जाएगा, जिसमें जनसंख्या से जुड़े विस्तृत सामाजिक और आर्थिक सवाल शामिल होंगे। फिलहाल सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे गणनाकर्मियों को सही जानकारी दें, ताकि देश की वास्तविक स्थिति को आंकड़ों के माध्यम से सही तरीके से दर्ज किया जा सके।

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