गुजरात में BJP के गढ़ में AAP की सेंध, नर्मदा में कैसे चला केजरीवाल का जादू?

Updated on 2026-04-29T15:58:15+05:30

गुजरात में BJP के गढ़ में AAP की सेंध, नर्मदा में कैसे चला केजरीवाल का जादू?

गुजरात में BJP के गढ़ में AAP की सेंध, नर्मदा में कैसे चला केजरीवाल का जादू?

गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव 2026 में भले ही भारतीय जनता पार्टी ने राज्यभर में मजबूत प्रदर्शन किया हो, लेकिन आदिवासी बहुल नर्मदा जिले से जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है. यहां आम आदमी पार्टी ने ऐसा उलटफेर किया कि खुद पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे गुजरात की राजनीति में बदलाव का संकेत बताया.

नर्मदा में AAP ने कैसे पलटी बाजी?

पिछले चुनाव में सीमित सीटों पर सिमटी आम आदमी पार्टी इस बार 650 से ज्यादा सीटों तक पहुंच गई. सबसे बड़ा झटका नर्मदा जिला पंचायत में देखने को मिला, जहां 22 में से 15 सीटों पर AAP ने कब्जा जमाया. इतना ही नहीं, कई तालुका पंचायतों में भी पार्टी ने बहुमत हासिल कर लिया. देदियापाड़ा जैसे आदिवासी क्षेत्र में बीजेपी का खाता तक नहीं खुलना बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है.

केजरीवाल ने बताया जीत का फॉर्मूला

अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यह जीत सिर्फ वोटों की नहीं, भरोसे की जीत है. पार्टी ने गांव-गांव जाकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सस्ती बिजली, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और आम लोगों की भागीदारी का मुद्दा उठाया. यही नैरेटिव सीधे ग्रामीण, गरीब, युवा, महिला और आदिवासी मतदाताओं से जुड़ गया. AAP ने खुद को सिर्फ विरोधी दल नहीं, बल्कि विकल्प के तौर पर पेश किया.

चैतर वसावा बने गेमचेंजर

नर्मदा में AAP की इस सफलता के पीछे विधायक चैतर वसावा का नाम सबसे अहम माना जा रहा है. आदिवासी जमीन, जंगल और अधिकारों के मुद्दे पर लगातार संघर्ष करने वाले वसावा ने इलाके में गहरी पकड़ बनाई. जेल जाने के बाद भी उनका जनसमर्थन कम नहीं हुआ. यही वजह रही कि जनता ने सत्ता से ज्यादा अपने स्थानीय नेता पर भरोसा जताया.

FIR और दबाव के बीच भी बढ़ा जनाधार

केजरीवाल ने दावा किया कि पिछले एक महीने में 170 से ज्यादा FIR और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों के बावजूद पार्टी की सीटें दस गुना बढ़ीं. इसका मतलब साफ है कि AAP को अब सिर्फ शहरी नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी गुजरात में भी भावनात्मक समर्थन मिलने लगा है.

2027 विधानसभा का ट्रेलर?

नर्मदा के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि गुजरात में मुकाबला अब सिर्फ BJP बनाम कांग्रेस नहीं रह गया. AAP तेजी से तीसरी ताकत बन रही है. अगर यही रफ्तार जारी रही तो 2027 के विधानसभा चुनाव में गुजरात की राजनीति का पूरा समीकरण बदल सकता है.

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