फिल्म की नाकामी के बाद चिराग ने किस मोड़ पर बदला अपना सफर
फिल्म की नाकामी के बाद चिराग ने किस मोड़ पर बदला अपना सफर
बॉलीवुड की चमक-दमक से राजनीति की दुनिया में जाना जितना आसान दिखता है, चिराग पासवान की कहानी उतनी ही अलग है। कभी उन्हें फिल्मों में बड़ा चेहरा बनाने की कोशिश हुई थी, लेकिन कंगना रनौत के साथ आई उनकी फिल्म फ्लॉप रही और यहीं से उनकी जिंदगी ने नई दिशा पकड़ ली।
चिराग का फिल्मी करियर सिर्फ एक कोशिश भर साबित हुआ। इंडस्ट्री में उनकी शुरुआत को लेकर काफी उम्मीदें जताई जा रही थीं, पर रिलीज़ के बाद फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बिल्कुल भी असर नहीं दिखाया। कलाकार के रूप में उन्हें पहचान नहीं मिल सकी और धीरे-धीरे उन्होंने महसूस किया कि यह रास्ता उनके लिए नहीं बना।
फिल्म के असफल होने के कुछ समय बाद ही चिराग राजनीति की तरफ लौटे और अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत को आगे बढ़ाने का फैसला किया। यह वह मोड़ था जिसने उनकी पहचान पूरी तरह बदल दी। उन्होंने खुद को जमीन से जुड़े मुद्दों, युवा राजनीति और बिहारी अस्मिता के सवालों पर केंद्रित किया, जिससे उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा।
आज चिराग पासवान राष्ट्रीय राजनीति में एक मजबूत चेहरा माने जाते हैं। गठबंधन की राजनीति में उनकी भूमिका अहम रही है और हाल के चुनावों में उन्होंने अपनी पार्टी को नया जनाधार दिलाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग ने समय रहते सही राह चुनी, वरना एक नाकाम फिल्म की छवि से बाहर निकलना कठिन होता।
कहा जा सकता है कि फिल्म की नाकामी ने ही उन्हें असल दिशा दिखाई। चिराग ने उस अनुभव को झटका नहीं, बल्कि सीख बनाकर आगे बढ़ने का फैसला किया और राजनीति में अपनी एक अलग जगह बना ली। अब उनके समर्थकों का मानना है कि अगर वह पर्दे पर सफल होते, तो शायद देश को यह युवा नेता नहीं मिलता।