“वक्फ एक्ट पर रोक: ‘वक्फ बाय यूजर’ मामले अपडेट”

Updated on 2025-09-15T13:15:05+05:30

“वक्फ एक्ट पर रोक: ‘वक्फ बाय यूजर’ मामले अपडेट”

“वक्फ एक्ट पर रोक: ‘वक्फ बाय यूजर’ मामले अपडेट”

कुछ महीने पहले संसद के बजट सत्र में वक्फ बोर्ड (संशोधन) अधिनियम 2025 पेश किया गया था। इसके देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध हुए, लेकिन दोनों सदनों में बहुमत से पास होने के बाद राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी। अब इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी।

CJI बीआर गवई की अगुआई वाली 2 जजों की बेंच ने इस कानून के खिलाफ दायर 5 याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं की तरफ से एडवोकेट कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और धवन पैरवी कर रहे थे, जबकि सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्टरूम में मौजूद थे।

मुख्य बातें:

वक्फ बाय यूजर पर फैसला:

कोर्ट ने इस मुद्दे पर अभी कोई निर्णय नहीं दिया। पहले के कानून में वक्फ बाय यूजर का प्रावधान था, यानी अगर कोई संपत्ति लंबे समय से वक्फ के अधीन है, तो वह वक्फ मानी जाएगी, चाहे बोर्ड के पास उसके कागजात हों या नहीं।

कौन बन सकता है वक्फ बोर्ड का सदस्य:

पहले कानून में यह शर्त थी कि वक्फ बोर्ड का सदस्य बनने के लिए कम से कम 5 साल से इस्लाम धर्म का पालन करना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त पर रोक लगा दी है। अब जब तक राज्य सरकार कोई उचित नियम नहीं बनाती, यह शर्त लागू नहीं होगी।

गैर-मुस्लिम सदस्यों की संख्या:

पहले कानून में वक्फ बोर्ड के 11 सदस्यों में कुछ गैर-मुस्लिम सदस्य होने का प्रावधान था। सुप्रीम कोर्ट ने तय किया कि वक्फ बोर्ड में 3 से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकते। केंद्रीय वक्फ परिषद में भी 4 से ज्यादा गैर-मुस्लिम सदस्य नहीं होंगे। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अगर संभव हो तो बोर्ड का सीईओ मुस्लिम सदस्य ही होना चाहिए।

जिला कलेक्टर के अधिकार:

पहले कानून के अनुसार, वक्फ बोर्ड जिस संपत्ति पर अतिक्रमण करता, यह तय करने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास था। कोर्ट ने कहा कि जिला कलेक्टर को नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों पर फैसला लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि यह शक्तियों के पृथक्करण का उल्लंघन होगा।

कानून कब बना:

वक्फ (संशोधन) बिल 2025 को बजट सत्र में दोनों सदनों में पास किया गया। लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 232 सांसदों ने बिल को मंजूरी दी। इसके बाद 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दे दी।

सुप्रीम कोर्ट में कानून रद्द करने की याचिका दायर की गई थी, लेकिन अदालत ने इसे रद्द करने से इंकार कर दिया और केवल कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है।