बजट सत्र की शुरुआत, राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- दशक ने बदली भारत की दिशा

Updated on 2026-01-28T17:44:35+05:30

बजट सत्र की शुरुआत, राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- दशक ने बदली भारत की दिशा

बजट सत्र की शुरुआत, राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- दशक ने बदली भारत की दिशा

संसद का बजट सत्र मंगलवार, 28 जनवरी 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संसद के संयुक्त सत्र में दिए गए अभिभाषण से हुई। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बीते दस वर्षों में देश की प्रगति, सामाजिक न्याय, आर्थिक सुधारों और विकसित भारत के लक्ष्य को विस्तार से सामने रखा। राष्ट्रपति ने कहा कि संसद के इस सत्र को संबोधित करना उनके लिए गर्व और प्रसन्नता का विषय है, क्योंकि भारत एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। 

राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने भाषण की शुरुआत देश की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए की। उन्होंने बताया कि बीता वर्ष भारत की तेज प्रगति के साथ-साथ सांस्कृतिक उत्सवों के लिए भी यादगार रहा। उन्होंने 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ का जिक्र करते हुए राष्ट्रकवि बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि अर्पित की और इस विषय पर संसद में हुई विशेष चर्चा के लिए सांसदों की सराहना की। 

सामाजिक न्याय पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर का सपना समानता और अवसरों की बराबरी पर आधारित था और भारतीय संविधान उसी भावना को आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग तक विकास पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने दावा किया कि बीते एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं, जो सरकार की नीतियों और योजनाओं की सफलता को दर्शाता है। 

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत ने इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर लिया है। उन्होंने बताया कि इस सदी के पहले 25 वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी क्षेत्रों में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। पिछले 10 से 11 वर्षों में देश की बुनियाद को हर स्तर पर मजबूत किया गया है, चाहे वह बुनियादी ढांचा हो, डिजिटल क्रांति हो या वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका । 

आर्थिक मोर्चे पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने आयकर कानून में किए गए बड़े बदलाव का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त करने का फैसला गरीब और मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। इससे न सिर्फ आम नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। 

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सरकार का तीसरा कार्यकाल 'विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में निर्णायक साबित होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत आत्मनिर्भरता, समावेशी विकास और वैश्विक नेतृत्व के नए मानक स्थापित करेगा। 

बजट सत्र के दौरान सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही सत्र की शुरुआत हो चुकी है और अब सबकी निगाहें 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं, जिससे देश की आगे की आर्थिक दिशा तय होगी। 

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