Buri Nazar: क्या लकड़ी छूने से बचती बुरी नजर? जानें ‘टच वुड’ का सच

Updated on 2025-11-15T18:12:07+05:30

Buri Nazar: क्या लकड़ी छूने से बचती बुरी नजर? जानें ‘टच वुड’ का सच

Buri Nazar: क्या लकड़ी छूने से बचती बुरी नजर? जानें ‘टच वुड’ का सच

Buri Nazar: बुरी नजर लगने का विश्वास सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में माना जाता है. इसलिए लोग नजर से बचने के लिए कई तरह के उपाय करते हैं. इन्हीं में से एक है टच वूड कहना.

जब कोई अपनी सफलता, सेहत या खुशकिस्मती की बात करता है, तो वह पास की लकड़ी को छूकर टच वूड कह देता है. यह आदत भारत ही नहीं, दुनिया भर में चलती है. इसका मकसद बुरी नजर और बदकिस्मती से बचना होता है.

क्या सच में लकड़ी छूने से नजर नहीं लगती?

इस बात का कोई वैज्ञानिक सबूत नहीं है. लेकिन परंपरा, मान्यता और ज्योतिष में इसे एक तरह का सुरक्षा प्रतीक माना जाता है.

टच वूड की मान्यता कैसे शुरू हुई?

पुरानी मान्यताओं के मुताबिक लकड़ी में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा का भाव माना जाता है. माना जाता है कि लकड़ी छूने से इंसान सकारात्मक शक्ति से जुड़ता है और बुरी नजर का असर कम महसूस करता है.

एक मान्यता यह भी है कि प्राचीन पैगन सभ्यताओं में लोग पेड़ों को दैवीय शक्ति का घर मानते थे, इसलिए पेड़ छूकर वे खुद को सुरक्षित महसूस करते थे.

ईसाई परंपरा में भी क्रॉस की लकड़ी को पवित्र माना गया, इसलिए लोगों ने लकड़ी छूकर दैवीय सुरक्षा मांगना शुरू किया.

ज्योतिष का नजरिया

ज्योतिष के अनुसार लकड़ी का संबंध शुभ ग्रहों—बृहस्पति और चंद्रमा—से माना जाता है. ये ग्रह सकारात्मकता, सुरक्षा और भावनात्मक संतुलन के प्रतीक हैं. इसलिए लकड़ी छूना शुभ ऊर्जा को आमंत्रित करने का एक सांकेतिक तरीका माना जाता है. यानि, टच वूड कहना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है, लेकिन विश्वास और परंपरा के आधार पर इसे नजर से बचाव का आसान उपाय माना जाता है.