आदिवासियों से थाना साफ करवाने पर भड़के CJI, बोले- 76 साल बाद भी?

Updated on 2026-05-05T14:54:50+05:30

आदिवासियों से थाना साफ करवाने पर भड़के CJI, बोले- 76 साल बाद भी?

आदिवासियों से थाना साफ करवाने पर भड़के CJI, बोले- 76 साल बाद भी?

CJI सूर्यकांत ने ओडिशा की अदालतों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आजादी के 76 साल बाद भी ऐसी अपमानजनक जमानत शर्तें न्यायपालिका की छवि खराब करती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें तुरंत अमान्य कर दिया.

जमानत की शर्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासी और दलित आरोपियों से पुलिस थाने साफ करवाने जैसी जमानत शर्तों पर कड़ा ऐतराज जताया है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ कहा कि ऐसी शर्तें न्याय नहीं, बल्कि अपमान का प्रतीक हैं.

CJI बोले- आजादी के बाद भी नहीं बदली सोच

सुनवाई के दौरान CJI ने नाराजगी जताते हुए कहा कि देश को आजाद हुए 76 साल हो चुके हैं, लेकिन कुछ अदालतों की सोच अब भी जातिगत पूर्वाग्रह से भरी दिख रही है. उन्होंने कहा कि ऐसे आदेश न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं.

ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश पर उठे सवाल

मामला ओडिशा का है, जहां भूमि अधिग्रहण के विरोध में गिरफ्तार किए गए आदिवासी और दलित समुदाय के लोगों को जमानत देते समय कई महीनों तक थाना साफ करने जैसी शर्तें लगा दी गई थीं. सुप्रीम कोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया.

सभी अपमानजनक शर्तें कीं रद्द

जस्टिस जॉयमाल्या बागची के साथ सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य की अदालतों द्वारा लगाई गई ऐसी सभी शर्तें तुरंत प्रभाव से अमान्य मानी जाएंगी. साथ ही देशभर की अदालतों को भविष्य में ऐसी शर्तें न लगाने का निर्देश दिया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने भेजा बड़ा संदेश

शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया कि जमानत किसी आरोपी की सामाजिक हैसियत देखकर नहीं तय की जा सकती. न्यायपालिका का काम सम्मान देना है, सामाजिक अपमान नहीं. इस फैसले को देशभर के हाईकोर्ट्स और न्यायिक अधिकारियों तक भेजने का आदेश भी दिया गया.

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