महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर घमासान: एमएनएस और शिवसेना (उद्धव गुट) का विरोध

Updated on 2025-07-02T12:28:50+05:30

महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर घमासान: एमएनएस और शिवसेना (उद्धव गुट) का विरोध

महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर घमासान: एमएनएस और शिवसेना (उद्धव गुट) का विरोध

महाराष्ट्र में केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत लागू की जा रही तीन भाषा नीति को लेकर जोरदार विरोध शुरू हो गया है। इस मुहिम की अगुवाई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे कर रहे हैं। एमएनएस का कहना है कि यह नीति राज्य की मातृभाषा मराठी के खिलाफ है और इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

राज ठाकरे की पार्टी के साथ-साथ शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने भी इस नीति के विरोध में मोर्चा खोल दिया है। दोनों दलों ने मिलकर मुंबई में शनिवार को एक बड़े विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई है। इन दलों का तर्क है कि केंद्र द्वारा थोपी जा रही तीन भाषा नीति — जिसमें हिंदी, अंग्रेज़ी और एक क्षेत्रीय भाषा को अनिवार्य किया गया है — वह महाराष्ट्र जैसे गैर-हिंदी भाषी राज्यों की भाषाई अस्मिता और स्वायत्तता के खिलाफ है।

एमएनएस ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि महाराष्ट्र में मराठी के ऊपर किसी भी अन्य भाषा को थोपने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया है कि जब महाराष्ट्र में पहले से ही मराठी और अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती हैं, तो हिंदी को अनिवार्य करने की ज़रूरत क्यों आ रही है।

विरोध के स्वर तेज़ होते जा रहे हैं और यह मुद्दा अब सियासी रंग लेता दिख रहा है। राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई ठोस बयान नहीं आया है, लेकिन विपक्षी दल इसे क्षेत्रीय स्वाभिमान से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में हैं।