ठंड में भी बरसते हैं बादल ! जानिए सर्दियों की बारिश का राज
ठंड में भी बरसते हैं बादल ! जानिए सर्दियों की बारिश का राज
जब भी बारिश की बात आती है, हमारे दिमाग में सबसे पहले गर्मी का मौसम आता है। तेज धूप, समुद्र से उठती भाप, बादल और फिर झमाझम बारिश - यह प्रक्रिया हम सभी को स्कूल से ही पढ़ाई जाती है। लेकिन सर्दियों में जब धूप कमजोर होती है और तापमान कम रहता है, तब भी कई बार बारिश हो जाती है। ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर ठंड में बारिश होती कैसे है ?
असल में, सर्दियों की बारिश का कारण गर्मियों से बिल्कुल अलग होता है। गर्मियों में सूरज की तेज़ गर्मी से समुद्र और नदियों का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप ठंडी ऊंचाई पर जाकर बादलों में बदल जाती है और फिर बारिश होती है। लेकिन सर्दियों में सूरज की गर्मी इतनी तेज़ नहीं होती कि बड़ी मात्रा में पानी भाप बन सके।
सर्दियों में बारिश की मुख्य वजह होती है पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance)। ये मौसम प्रणालियां भूमध्य सागर के आसपास बनती हैं और पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ते हुए भारत तक पहुंचती हैं। जब ये सिस्टम उत्तर भारत में प्रवेश करते हैं, तो अपने साथ नमी और बादल लेकर आते हैं। यही बादल सर्दियों में बारिश और कई बार पहाड़ों पर बर्फबारी का कारण बनते हैं।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे इलाकों में सर्दियों की बारिश अक्सर पश्चिमी विक्षोभ की वजह से ही होती है। इस दौरान आसमान में बादल छा जाते हैं, हवाएं चलती हैं और हल्की से मध्यम बारिश होती है। बारिश के बाद तापमान और गिर जाता है, जिससे ठंड और गलन बढ़ जाती है।
एक और अहम वजह है ठंडी हवा और गर्म हवा की टकराहट । जब ऊपरी वायुमंडल में गर्म और नम हवा पहुंचती है और नीचे ठंडी हवा मौजूद होती है, तो संघनन की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इससे बादल बनते हैं और बारिश हो जाती है, भले ही जमीन पर ठंड हो ।
यही कारण है कि सर्दियों की बारिश अक्सर कम समय की होती है, लेकिन इसका असर ज्यादा महसूस होता लिए यह बारिश कई बार फायदेमंद होती है, जबकि आम लोगों के लिए ठंड और बढ़ने की वजह बन जाती है।
फसलों के तो अगली बार जब ठंड में बूंदाबांदी हो और आप सोचें कि बिना गर्मी के बारिश कैसे हो गई, तो याद रखिए - यह सूरज की नहीं, बल्कि पश्चिमी विक्षोभ और मौसम के जटिल खेल की देन है।