20 की खांसी की दवा 100 में! दवा कारोबार का असली खेल?
20 की खांसी की दवा 100 में! दवा कारोबार का असली खेल?
खांसी-जुकाम जैसी आम दवा जो थोक बाजार में सिर्फ 20 रुपये में मिलती है, वही मेडिकल स्टोर पर 100 रुपये तक बेची जाती है। ऐसे उदाहरण दवा उद्योग और मेडिकल व्यापार के मुनाफे के बड़े अंतर को उजागर करते हैं।
जानकारों का कहना है कि दवा बनाने की लागत अक्सर बहुत कम होती है, लेकिन पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वितरण चैनल की वजह से कीमत कई गुना बढ़ जाती है। खुदरा दुकानों पर भी अच्छी खासी मार्जिन जुड़ जाती है, जिससे उपभोक्ता को दवा महंगी मिलती है।
फार्मेसी बिज़नेस में यही कारण है कि कई दवाओं पर 100% से ज्यादा मुनाफा तक कमा लिया जाता है। मरीजों के लिए यह जेब पर बोझ बनता है, लेकिन बाजार की हकीकत यही है कि दवा उद्योग मांग और मुनाफे के बीच चलता है।
इस पूरे मामले से यह सवाल भी उठता है कि क्या दवाओं की कीमतों पर सख्त निगरानी होनी चाहिए ताकि जरूरी दवाएं आम लोगों की पहुंच में रह सकें।