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ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी 'आकाशतीर' प्रणाली की निर्णायक भूमिका

Updated on 2025-05-20T14:18:18+05:30

ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी 'आकाशतीर' प्रणाली की निर्णायक भूमिका

ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी 'आकाशतीर' प्रणाली की निर्णायक भूमिका

भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के दौरान, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की।  इसके जवाब में पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने का प्रयास किया।  इन हमलों को रोकने में 'आकाशतीर' प्रणाली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

'आकाशतीर' भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा विकसित एक स्वदेशी वायु रक्षा नियंत्रण और रिपोर्टिंग प्रणाली है।  यह प्रणाली भारतीय सेना की वायु रक्षा को एकीकृत और स्वचालित बनाती है, जिससे कम समय में सटीक निर्णय लिए जा सकते हैं।  इसमें 3D टैक्टिकल रडार, लो-लेवल लाइटवेट रडार, और आकाश मिसाइल प्रणाली जैसे सेंसर शामिल हैं, जो एक संयुक्त वायु चित्र प्रदान करते हैं।  यह प्रणाली मोबाइल है, जिससे इसे युद्ध क्षेत्र में आसानी से तैनात किया जा सकता है।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, 'आकाशतीर' ने पाकिस्तान द्वारा भेजे गए सभी ड्रोन और मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया।  भारतीय सेना के अनुसार, यह प्रणाली 100% सफलता दर के साथ सभी हवाई खतरों को रोकने में सक्षम रही।  इस सफलता ने भारत की वायु रक्षा क्षमता को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाई है।

'आकाशतीर' प्रणाली को भारतीय वायु सेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (IACCS) के साथ जोड़ा गया है, जिससे सेना और वायु सेना के बीच समन्वय बढ़ा है।  इस एकीकरण से दोनों बलों के रडार और सेंसर एक ही नेटवर्क में काम करते हैं, जिससे हवाई खतरों की पहचान और प्रतिक्रिया में तेजी आती है।

ऑपरेशन सिंदूर में 'आकाशतीर' की सफलता ने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमताओं को प्रदर्शित किया है।  इस प्रणाली की प्रभावशीलता ने बीईएल के शेयरों में भी तेजी लाई है, जिससे कंपनी की प्रतिष्ठा और बाजार स्थिति मजबूत हुई है।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर में सैनिकों की सफलता की सराहना की और 'आकाशतीर' प्रणाली की भूमिका की प्रशंसा की।  उन्होंने इसे भारत की वायु रक्षा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया।

'आकाशतीर' प्रणाली की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भारत स्वदेशी तकनीक के माध्यम से अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर सकता है।  यह प्रणाली भविष्य में भी भारत की वायु रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।