Delhi Sultanate: पैगंबर का सपना आया तो सुल्तान ने बनवाई हौजखास झील

Updated on 2025-10-17T11:18:26+05:30

Delhi Sultanate: पैगंबर का सपना आया तो सुल्तान ने बनवाई हौजखास झील

Delhi Sultanate: पैगंबर का सपना आया तो सुल्तान ने बनवाई हौजखास झील

Delhi Sultanate:दिल्ली की हर गली में एक न एक कहानी छिपी है. आज हम आपको बताएंगे हौज-ए-शम्सी यानी हौज खास झील की कहानी, जो दिल्ली के सबसे पुराने और खूबसूरत स्थलों में से एक है. यह झील करीब 800 साल पुरानी है. आइए जानते हैं इसका इतिहास.

हौज खास झील का निर्माण

कहा जाता है कि सुल्तान इल्तुतमिश को एक बार सपने में पैगंबर मोहम्मद दिखाई दिए. उन्होंने महरौली के जंगल में वह जगह दिखाई जहां उनके घोड़े बुराक ने अपने खुर रखे थे. अगली सुबह सुल्तान अपने गुरु ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी के साथ उस जगह पहुंचे, जहां चमत्कारिक रूप से मीठे पानी का सोता फूट पड़ा. इसके बाद सुल्तान ने वहां एक बड़ा जलाशय बनवाने का आदेश दिया.

नाम क्यों पड़ा हौज-ए-शम्सी?

इस झील का नाम हौज-ए-शम्सी रखा गया, जिसका मतलब है “सूर्य की झील”. यह नाम सुल्तान इल्तुतमिश की उपाधि शम्सुद्दीन से लिया गया है, जिसका अर्थ है “आस्था का सूर्य”. इसका निर्माण 1230 ईस्वी के आसपास हुआ था. झील के बीच में सुल्तान ने लाल बलुआ पत्थर से एक सुंदर मंडप बनवाया, जिसमें वह पत्थर रखा गया था जिस पर पैगंबर के घोड़े के खुर का निशान बताया जाता है.

इब्न बतूता ने की थी तारीफ

मोरक्को के यात्री इब्न बतूता ने मोहम्मद बिन तुगलक के समय दिल्ली की यात्रा की थी और इस झील को “मीठे पानी की नदी” बताया था. समय के साथ कई राजवंशों ने इस झील में अपने-अपने बदलाव किए.

लोदी काल में इसके किनारे जहाज महल बनवाया गया, जो पानी में तैरते महल जैसा दिखता था और यात्रियों के विश्राम के लिए इस्तेमाल होता था. मुगल काल में यहां फव्वारे, बगीचे और मंडप जोड़े गए.

आज हौज खास झील दिल्ली के इतिहास और संस्कृति का अहम हिस्सा है. 2023 में स्थानीय लोगों ने “प्राइड ऑफ शम्सी” नाम से एक समूह बनाकर एएसआई और एनजीओ सीड्स के साथ मिलकर झील की सफाई भी की थी.