Delimitation: "न फंड मिलेगा, न हमारी बात सुनी जाएगी" – 5 राज्यों के CM और डिप्टी CM ने परिसीमन के नुकसान बताए।

Updated on 2025-03-22T17:34:14+05:30

Delimitation: "न फंड मिलेगा, न हमारी बात सुनी जाएगी" – 5 राज्यों के CM और डिप्टी CM ने परिसीमन के नुकसान बताए।

Delimitation: "न फंड मिलेगा, न हमारी बात सुनी जाएगी" – 5 राज्यों के CM और डिप्टी CM ने परिसीमन के नुकसान बताए।

Delimitation: चेन्नई में आज (22 मार्च) परिसीमन के मुद्दे पर बड़ी बैठक हुई, जिसमें दक्षिण भारत के चार राज्यों के मुख्यमंत्री और एक उपमुख्यमंत्री शामिल हुए। इसके अलावा, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के विपक्षी दलों के नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान सभी नेताओं ने परिसीमन से अपने राज्यों को होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताई।

क्यों हो रही है परिसीमन का विरोध?

परिसीमन का मतलब लोकसभा सीटों का दोबारा बंटवारा है, जो 2026 के बाद होने की संभावना है। इसमें जनसंख्या के आधार पर सीटों का निर्धारण होगा। यानी जिन राज्यों की जनसंख्या ज्यादा है, उन्हें ज्यादा सीटें मिलेंगी, जबकि कम जनसंख्या वाले राज्यों की सीटें घट सकती हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर भारत के राज्यों में जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण पर कड़ी मेहनत की है। अगर परिसीमन लागू होता है, तो उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसी जगहों पर लोकसभा सीटें बढ़ेंगी, जबकि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना जैसी जगहों पर सीटें कम हो सकती हैं। दक्षिण भारतीय राज्य इसी को लेकर नाराज़ हैं।

नेताओं ने क्या कहा?

 तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन – "हम परिसीमन के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह निष्पक्ष होना चाहिए। जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में मेहनत की, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। अगर हमारी लोकसभा सीटें कम हुईं, तो केंद्र सरकार से फंड लेने में दिक्कत होगी और हमारे राज्यों का विकास प्रभावित होगा।"

 केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन – "बीजेपी बिना किसी चर्चा के परिसीमन लागू करना चाहती है। इससे उत्तर भारतीय राज्यों को फायदा होगा और दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व संसद में कम हो जाएगा।"

 तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी – "परिसीमन के ज़रिए दक्षिण भारतीय राज्यों को सज़ा देने की कोशिश की जा रही है। हमने जनसंख्या नियंत्रण और विकास पर ध्यान दिया, लेकिन अब हमें ही नुकसान होगा। हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे।"

 कर्नाटक के डिप्टी सीएम डी.के. शिवकुमार – "हमने हमेशा राष्ट्रीय हित में काम किया और जनसंख्या नियंत्रण किया। लेकिन अब हमें ही इसकी सज़ा दी जा रही है। यह अन्यायपूर्ण है और हम इसका विरोध करेंगे।"

 पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान – "बीजेपी वहां सीटें बढ़ाना चाहती है जहां उसे फायदा है, और जहां हार होती है वहां सीटें घटाना चाहती है। हम इस तरह के परिसीमन का विरोध करेंगे।"

 ओडिशा के बीजद प्रमुख नवीन पटनायक – "परिसीमन को जनसंख्या के आधार पर लागू करना गलत होगा। केंद्र सरकार को सभी दलों से चर्चा करने के बाद ही कोई कदम उठाना चाहिए।"

आगे क्या होगा?

दक्षिण भारतीय राज्य परिसीमन को लेकर एकजुट हो गए हैं और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर रहे हैं। क्या केंद्र सरकार इन राज्यों की मांग सुनेगी, या परिसीमन तय प्रक्रिया के अनुसार ही लागू होगा? यह देखना दिलचस्प होगा।