वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी

Updated on 2026-02-04T15:26:37+05:30

वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी

वकील होने के बावजूद ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में दलील नहीं दे सकेंगी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से दलील न देने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आम तौर पर यह तथ्य सामने आता है कि ममता बनर्जी कानून की पढ़ाई कर चुकी हैं और एलएलबी डिग्री धारक हैं। इसके बावजूद वह किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील पक्ष नहीं रख सकतीं। इसके पीछे भारतीय कानून व्यवस्था से जुड़े स्पष्ट नियम और प्रक्रियाएं हैं।

कानूनी जानकारों के अनुसार, केवल कानून की डिग्री होना किसी व्यक्ति को अदालत में वकालत करने का स्वतः अधिकार नहीं देता। भारत में वकालत करने के लिए अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत संबंधित राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण अनिवार्य होता है। इसके अलावा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार, जो व्यक्ति सक्रिय राजनीति या सरकारी पद पर है, वह प्रैक्टिसिंग एडवोकेट के रूप में अदालत में पेश नहीं हो सकता।

सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी ने भले ही कानून की शिक्षा प्राप्त की हो, लेकिन वह बार काउंसिल में पंजीकृत प्रैक्टिसिंग एडवोकेट नहीं हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद पर रहते हुए उनके लिए अदालत में पेश होकर दलील देना नियमों के दायरे में नहीं आता। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट में किसी भी मामले में उनकी ओर से वरिष्ठ वकील या अधिकृत अधिवक्ता ही पक्ष रखते हैं।

वहीं दूसरी ओर, यह भी स्पष्ट किया जाता है कि कोई भी नागरिक, यदि वह स्वयं किसी मामले में पक्षकार है, तो व्यक्तिगत रूप से अदालत में अपनी बात रख सकता है। हालांकि, जब मामला राज्य सरकार या संवैधानिक संस्था से जुड़ा हो, तो वहां निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। इस स्थिति में सरकार की ओर से अधिकृत वकील ही अदालत में दलील पेश करते हैं।

इस बीच, कानूनी विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में वकालत के लिए एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड होना आवश्यक है, जो एक अतिरिक्त योग्यता और प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। बताया जा रहा है कि इन्हीं कानूनी प्रावधानों के कारण ममता बनर्जी आज सुप्रीम कोर्ट में स्वयं दलील नहीं रख पाएंगी। प्रशासन का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया नियमों के तहत ही संचालित होती है और सभी पक्षों को उन्हीं का पालन करना होता है।

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