बंगाल एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग और सरकार आमने-सामने
बंगाल एसआईआर विवाद पर चुनाव आयोग और सरकार आमने-सामने
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार की ओर से कानून-व्यवस्था की स्थिति पर उठाए गए सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए आरोपों का खंडन किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया संवैधानिक प्रावधानों और निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप कराई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार राज्य सरकार ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक दबाव, सुरक्षा जोखिम और राजनीतिक दुरुपयोग की आशंका जताई थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई थी। राज्य सरकार का कहना है कि जमीनी स्तर पर तनाव की स्थिति बन सकती है, जिसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में इन दावों को अस्वीकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण कार्य नियमित चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है और इसे लेकर अनावश्यक आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं। आयोग ने यह भी कहा कि अधिकारियों और फील्ड स्टाफ की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं।
बताया जा रहा है कि आयोग ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बाधा डालने या अधिकारियों को धमकाने जैसी घटनाओं की सूचनाएं मिली हैं। इन मामलों को लेकर सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया गया है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव का असर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर पड़ सकता है।
इस बीच सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्क दर्ज किए गए। अदालत ने प्रक्रिया की पारदर्शिता, सुरक्षा व्यवस्था और संवैधानिक दायित्वों से जुड़े पहलुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि आयोग अदालत के निर्देशों के अनुरूप आगे की कार्रवाई करेगा।
फिलहाल एसआईआर को लेकर विवाद जारी है, जबकि चुनाव आयोग पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित कार्यक्रम के तहत आगे बढ़ाने की बात कह रहा है। वहीं राज्य सरकार कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संतुलन के मुद्दे पर अपनी आपत्तियां बनाए हुए है।
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