Fatty Liver Disease: सिर्फ शराब नहीं, खराब लाइफस्टाइल भी बिगाड़ रही लिवर स्वास्थ्य

Updated on 2026-03-03T12:58:31+05:30

Fatty Liver Disease: सिर्फ शराब नहीं, खराब लाइफस्टाइल भी बिगाड़ रही लिवर स्वास्थ्य

Fatty Liver Disease: सिर्फ शराब नहीं, खराब लाइफस्टाइल भी बिगाड़ रही लिवर स्वास्थ्य

Why Fatty Liver Is Found During Routine Checkup: कई लोग खुद को पूरी तरह स्वस्थ मानते हुए नियमित हेल्थ चेकअप कराते हैं, लेकिन अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अचानक फैटी लिवर की समस्या सामने आ जाती है. खास बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बहुत हल्के या लगभग न के बराबर होते हैं. इसी वजह से इसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. मेडिकल भाषा में इसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टियाटोटिक लिवर डिजीज कहा जाता है. जब लिवर के वजन का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा फैट हो जाता है, तो इसे फैटी लिवर माना जाता है. समय पर ध्यान न देने पर यह सिरोसिस तक पहुंच सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर शरीर का बेहद सहनशील अंग है और शुरुआती चरण में सामान्य रूप से काम करता रहता है. थकान या पेट के ऊपरी हिस्से में हल्की भारीपन जैसी शिकायतें लोग गंभीरता से नहीं लेते. अक्सर यह समस्या रूटीन अल्ट्रासाउंड या किसी अन्य जांच के दौरान सामने आती है. कई बार शुरुआती दौर में लिवर फंक्शन टेस्ट भी सामान्य रहते हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादा कैलोरी, खासकर मीठे पेय और रिफाइंड कार्ब्स, लिवर में फैट जमा करते हैं. यह स्थिति मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और मेटाबॉलिक सिंड्रोम से जुड़ी होती है. इसलिए इसे सिर्फ लिवर की बीमारी नहीं, बल्कि पूरे मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्या माना जाता है.

भारत में शहरी लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठकर काम करना, प्रोसेस्ड फूड, कम नींद और तनाव इसके प्रमुख कारण हैं. बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इससे प्रभावित हैं, जो शराब नहीं पीते.

अच्छी बात यह है कि शुरुआती चरण में फैटी लिवर को ठीक किया जा सकता है. 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करना, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट व्यायाम, मीठे पेय से परहेज और डायबिटीज व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण में रखना इससे बचाव के प्रभावी उपाय हैं.

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