डिजिटल अरेस्ट का खौफ, एक कॉल और उड़ गए 15 करोड़

Updated on 2026-01-12T16:55:42+05:30

डिजिटल अरेस्ट का खौफ, एक कॉल और उड़ गए 15 करोड़

डिजिटल अरेस्ट का खौफ, एक कॉल और उड़ गए 15 करोड़

देश की राजधानी दिल्ली से साइबर ठगी का अब तक का सबसे चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अमेरिका में करीब 48 साल तक डॉक्टर के तौर पर सेवाएं देने वाले एनआरआई दंपति ओम तनेजा और उनकी पत्नी इंदिरा तनेजा साइबर जालसाजों के ऐसे जाल में फंसे कि उनकी जिंदगी की जमा-पूंजी कुछ ही दिनों में खत्म हो गई। ठगों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर दंपति को "डिजिटल अरेस्ट" किया और करीब 15 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए ।

जानकारी के मुताबिक, ठगी की शुरुआत 24 दिसंबर को हुई। दंपति को एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताया। फोन पर कहा गया कि उनके नाम से मनी लॉन्ड्रिंग और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। जालसाजों ने पीएमएलए कानून का हवाला देते हुए गिरफ्तारी और जेल भेजने की धमकी दी। इतने बड़े आरोप सुनकर

दंपति घबरा गए और यहीं से ठगों का खेल शुरू हो गया।

इसके बाद ठगों ने दंपति को लगातार वीडियो कॉल पर "निगरानी" में रखा। सुबह से रात तक उन्हें फोन कैमरा ऑन रखने को कहा गया। बाहर किससे बात करनी है, घर से निकलना है या नहीं- हर चीज पर ठगों का नियंत्रण था। अगर पति बात करता तो पत्नी के फोन पर वीडियो कॉल आ जाती और अगर पत्नी फोन उठाती तो पति की निगरानी शुरू हो जाती। इस मानसिक दबाव ने दंपति को पूरी तरह तोड़ दिया।

जालसाजों ने भरोसा दिलाया कि यह सब सिर्फ जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और जैसे ही जांच पूरी होगी, पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। इसी झांसे में आकर दंपति ने अलग-अलग किश्तों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। कभी 2 करोड़, कभी 2.10 करोड़ और इसी तरह कुल आठ अलग-अलग बैंक खातों में करीब 14 करोड़ 85 लाख रुपये भेज दिए गए। ठग लगातार कहते रहे कि अगर एक भी निर्देश का पालन नहीं हुआ तो तुरंत गिरफ्तारी हो जाएगी।

करीब दो हफ्तों तक चले इस "डिजिटल अरेस्ट" के बाद जब ठगों का संपर्क टूटा, तब दंपति को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने दिल्ली पुलिस से संपर्क किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल को जांच सौंप दी है और ट्रांजैक्शन ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

यह मामला एक कड़ी चेतावनी है कि साइबर ठग अब सिर्फ फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डर, कानून और तकनीक का सहारा लेकर लोगों को मानसिक रूप से बंधक बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर आने वाली कॉल पर भरोसा न करें और तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।