हिमाचल का ग्रहन रोड बना कूड़ाघर: पर्यटन तो बढ़ाया, लेकिन सफाई का जिम्मा कौन लेगा?

Updated on 2025-05-28T14:28:55+05:30

हिमाचल का ग्रहन रोड बना कूड़ाघर: पर्यटन तो बढ़ाया, लेकिन सफाई का जिम्मा कौन लेगा?

हिमाचल का ग्रहन रोड बना कूड़ाघर: पर्यटन तो बढ़ाया, लेकिन सफाई का जिम्मा कौन लेगा?

 

हिमाचल प्रदेश का ग्रहन रोड, जो पर्यटकों के लिए एक शांत और सुंदर ट्रेकिंग रूट होना चाहिए, आज कचरे के ढेर में तब्दील हो चुका है। इस रास्ते पर जगह-जगह प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स और बिस्किट के रैपर, शराब की खाली बोतलें और कूड़े के बैग बिखरे पड़े हैं।

सरकार पर्यटन को राजस्व का जरिया तो बना रही है, लेकिन जिम्मेदारी की बात कौन करेगा? सवाल यह है कि जब सैलानियों को बुलाया जा रहा है, तो क्या उनके पीछे छोड़े जाने वाले कचरे को संभालने के लिए कोई सिस्टम मौजूद है?

इस इलाके में ना तो डस्टबिन हैं, ना नियमित सफाई अभियान, ना कचरा छांटने की व्यवस्था, और ना ही गंदगी फैलाने वालों पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई होती है।

पर्यटकों को दोष देना आसान है, लेकिन असली सवाल ये है कि प्रशासन कहां है? क्या जिम्मेदारी सिर्फ आने वालों की है, या सरकार और स्थानीय प्रशासन की भी कोई भूमिका है?

हकीकत ये है कि जब आप दुनियाभर से लोगों को बुलाते हैं, तो आपको सफाई, पर्यावरण संतुलन और संसाधनों के प्रबंधन की भी उतनी ही गंभीरता से तैयारी करनी चाहिए। वरना हिमाचल की हसीन वादियां, कूड़े का जंगल बन जाएंगी।