कनाडा ने बदला रुख? पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले ‘भारतीय हस्तक्षेप’ पर नरमी के संकेत

Updated on 2026-02-26T15:09:41+05:30

कनाडा ने बदला रुख? पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले ‘भारतीय हस्तक्षेप’ पर नरमी के संकेत

कनाडा ने बदला रुख? पीएम मार्क कार्नी के भारत दौरे से पहले ‘भारतीय हस्तक्षेप’ पर नरमी के संकेत

यह बदलाव ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की संभावित भारत यात्रा की चर्चा तेज है। विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

रिपोर्ट, के मुताबिक कनाडा की राजनीतिक और कूटनीतिक भाषा में पहले की तुलना में संतुलन दिखाई दे रहा है।

भारत-कनाडा रिश्तों में क्यों आई थी तल्खी?

पिछले कुछ वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में तनाव बढ़ा था। इसके पीछे मुख्य कारण थे:

•कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों को लेकर भारत की चिंता

•कनाडाई नेतृत्व द्वारा भारतीय एजेंसियों पर लगाए गए आरोप

•राजनयिक निष्कासन और कड़े बयानबाज़ी

•इन घटनाओं के कारण दोनों देशों के व्यापार, शिक्षा सहयोग और रणनीतिक साझेदारी पर भी असर पड़ा।

अब क्यों बदल रहा है कनाडा का रुख?

विश्लेषकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं:

1. आर्थिक हित – भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और कनाडा निवेश व व्यापार बढ़ाना चाहता है।

2. भूराजनीतिक दबाव – इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की रणनीतिक अहमियत बढ़ी है।

3. घरेलू राजनीति – कनाडा में भारतीय मूल के मतदाताओं का प्रभाव भी एक कारक माना जा रहा है।

4. कूटनीतिक पुनर्संतुलन – लंबे तनाव से दोनों देशों को नुकसान हो रहा था।

क्या पीएम कार्नी की भारत यात्रा से रिश्ते सुधरेंगे?

यदि यात्रा होती है, तो यह दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का बड़ा संकेत माना जाएगा। संभावित एजेंडा में शामिल हो सकते हैं:

•व्यापार समझौते और निवेश

•शिक्षा व तकनीकी सहयोग

•सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग

•प्रवासी भारतीय समुदाय से जुड़े मुद्दे

विशेषज्ञों की राय

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा का “टोन डाउन” करना यह दर्शाता है कि दोनों देश टकराव से संवाद की ओर बढ़ना चाहते हैं। हालांकि, स्थायी सुधार तभी संभव होगा जब संवेदनशील सुरक्षा मुद्दों पर स्पष्ट समझ बने।

आगे क्या?

आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि यह बदलाव सिर्फ कूटनीतिक भाषा तक सीमित है या वास्तव में नीति स्तर पर भी परिवर्तन हो रहा है। अगर सकारात्मक प्रगति होती है तो भारत-कनाडा संबंध फिर से मजबूत साझेदारी की दिशा में जा सकते हैं।

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