बेल की आस टूटी क्या हुआ न्याय की आहट

Updated on 2025-12-03T15:22:29+05:30

बेल की आस टूटी क्या हुआ न्याय की आहट

बेल की आस टूटी क्या हुआ न्याय की आहट

कर्नाटक हाई कोर्ट ने रेप व यौन उत्पीड़न मामले में ओलंपिक स्तर की मुश्किल झेल रहे प्रज्वल रेवन्ना की जमानत याचिका खारिज कर दी। निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गंभीर आरोपों को देखते हुए बेल नहीं दी जा सकती।

रेवन्ना पर आरोप है कि उन्होंने अपनी एक घरेलू सहायक महिला का विवाहेतर संबंधों व भरोसे का दुरुपयोग करके यौन उत्पीड़न व बलात्कार किया। उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिनमें दो रेप के साथ यौन उत्पीड़न व अश्लील वीडियो बनाने व प्रसारित करने के आरोप शामिल हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने 2144 पन्नों की चार्जशीट दायर की थी।

बेल की मांग करते समय रेवन्ना के वकील ने अदालत में तर्क दिया था कि शुरूआती शिकायत में सीधे IPC की धारा 376 (बलात्कार) का जिक्र नहीं था और केस दर्ज होने में देरी हुई। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता व संभावित गवाहों पर दबाव बनाए जाने का जोखिम देखते हुए बेल देने योग्य नहीं है।

इस फैसले के साथ न्याय व्यवस्था ने एक बार फिर साफ किया है कि यौन अपराधों में शिकार की सुरक्षा, गवाहों की रक्षा व समाज में भय-मुक्त माहौल की अहमियत है। अब अगली सुनवाई में मामला पूरी तरह अदालत में चलेगा, और सम्मान व न्याय दोनों की लड़ाई जारी रहेगी।