नक्सल बेल्ट में कैसे टूटी 29 कमांडरों की कमर…

Updated on 2025-12-10T15:45:12+05:30

नक्सल बेल्ट में कैसे टूटी 29 कमांडरों की कमर…

नक्सल बेल्ट में कैसे टूटी 29 कमांडरों की कमर…

कई वर्षों से देश के सबसे खतरनाक इलाकों में सक्रिय नक्सली कमांडरों का नेटवर्क आखिरकार बिखरने लगा है। केंद्र सरकार की नई रणनीति, तेज़ ऑपरेशन्स और लगातार दबाव के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने रेड कॉरिडोर में बड़ा बदलाव दर्ज किया है। अब गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट दी है कि 29 टॉप नक्सल नेताओं को हाल में खत्म किया गया और उनकी सक्रियता तेजी से नीचे जा रही है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक देश के नक्सल प्रभावित जिलों में सुरक्षा बलों की तैनाती को पहले से कहीं ज्यादा मजबूत किया गया है। कुल 574 कंपनियां अर्द्धसैनिक बलों की इस समय अलग-अलग ऑपरेशन्स में लगी हैं। इन इलाकों में सड़कें, संचार, हेलीकॉप्टर सपोर्ट और कैंप सेटअप बढ़ाए गए हैं ताकि नक्सलियों की मूवमेंट पर लगातार नज़र रखी जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, इस दबाव का सीधा असर उनके टॉप कमांडरों पर पड़ा, जो या तो मुठभेड़ों में ढेर हुए या भारी नुकसान के बाद जंगलों से बाहर धकेल दिए गए।

अधिकारियों का दावा है कि पहले जहां नक्सली ग्रामीण इलाकों में दबदबा बनाए रखते थे, वहीं अब कई जिलों में उनकी सक्रियता लगभग खत्म हो चुकी है। कई कमांडरों को खत्म होने के बाद उनके नेटवर्क में भी टूटन आई, हथियार सप्लाई, फंडिंग और काडर ट्रेनिंग पर बड़ा असर पड़ा है। सुरक्षा बलों ने बताया कि नई इंटेलिजेंस-ड्रिवन रणनीति की वजह से ऑपरेशन्स ज्यादा सटीक और तेज़ हुए, जिससे बड़े चेहरों को निशाना बनाना आसान हो गया।

इस पूरे अभियान का दूसरा बड़ा असर स्थानीय आबादी पर पड़ा है, जो अब पहले से ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रही है। गांवों में पुलिस कैंप बनने और लगातार गश्त बढ़ने के बाद नक्सलियों को छिपने के मौके भी कम मिले। सरकार का दावा है कि जिन जिलों में पहले हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, वहां अब विकास कार्य भी बेहतर गति से शुरू हो रहे हैं।

हालांकि सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। नक्सली छोटे समूहों के रूप में अभी भी सक्रिय हैं और कई बार सालाना फंडिंग या हथियार हासिल करने की कोशिश करते हैं। लेकिन टॉप कमांडरों के खात्मे के बाद उनकी ताकत, पकड़ और रणनीति पहले जैसी नहीं रही।

रेड कॉरिडोर में चल रहे इन ऑपरेशन्स ने साफ कर दिया है कि नक्सलियों का पुराना नेटवर्क अब वैसा नहीं बचा। 29 बड़े नाम खत्म होने के बाद उनके संगठन की रीढ़ पर सबसे बड़ा प्रहार हुआ है, और सुरक्षा बलों का दावा है कि आने वाले महीनों में यह दबाव और बढ़ेगा।