पाकिस्तान-चीन की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी, भारत के लिए कितना खतरा?

Updated on 2026-01-14T15:28:50+05:30

पाकिस्तान-चीन की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी, भारत के लिए कितना खतरा?

पाकिस्तान-चीन की मिसाइल ताकत कितनी बड़ी, भारत के लिए कितना खतरा?

दक्षिण एशिया में बदलती सुरक्षा तस्वीर के बीच पाकिस्तान और चीन की रॉकेट-मिसाइल फोर्स भारत के लिए एक गंभीर रणनीतिक चुनौती के रूप में उभर रही है। हाल के वर्षों में दोनों देशों ने न केवल अपनी मिसाइलों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि उनकी मारक क्षमता, सटीकता और तकनीकी स्तर को भी काफी उन्नत किया है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह बढ़त भारत की सुरक्षा योजनाओं पर सीधा असर डालती है। 

पाकिस्तान ने अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड (ARFC) का गठन किया है। यह कमांड मुख्य रूप से पारंपरिक यानी नॉन-न्यूक्लियर मिसाइलों और रॉकेट सिस्टम पर केंद्रित है। पाकिस्तान की फतह सीरीज की मिसाइलें, जिनकी रेंज 750 से 1000 किलोमीटर तक बताई जा रही है, इस नई ताकत की रीढ़ हैं। माना जा रहा है कि मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान को लंबी दूरी के सटीक हमलों की कमी का एहसास हुआ, जिसके चलते यह ढांचा तैयार किया गया। ARFC को काफी हद तक चीन की मिसाइल फोर्स के मॉडल पर खड़ा किया गया है। 

चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे उन्नत मिसाइल फोर्स मानी जाती है। विभिन्न रक्षा रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के पास 1250 से अधिक बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें हैं, जिनमें 600 से ज्यादा परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम हैं। इसके अलावा, चीन हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक में भी काफी आगे निकल चुका है, जो मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बनती है। 

भारत की बात करें तो उसके पास अग्नि-5 जैसी लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें और ब्रह्मोस जैसी दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलें हैं। गुणवत्ता और सटीकता के मामले में भारत की मिसाइलें मजबूत मानी जाती हैं, लेकिन संख्या और कुछ अत्याधुनिक तकनीकों के मामले में भारत अभी चीन से पीछे है। यही वजह है कि रक्षा विशेषज्ञ दो-मोर्चे पर संभावित संघर्ष को भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम मानते हैं। 

कुल मिलाकर, पाकिस्तान की तेजी से बढ़ती रॉकेट फोर्स और चीन की विशाल, तकनीकी रूप से उन्नत मिसाइल क्षमता मिलकर भारत के लिए एक जटिल सुरक्षा चुनौती पैदा करती हैं। आने वाले समय में भारत के लिए मिसाइल डिफेंस, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक संतुलन पर और अधिक जोर देना अनिवार्य हो गया है।