590 करोड़ धोखाधड़ी में IDFC First Bank का बड़ा खुलासा, प्रदेश सरकार ने FIR दर्ज की

Updated on 2026-02-24T17:56:43+05:30

590 करोड़ धोखाधड़ी में IDFC First Bank का बड़ा खुलासा, प्रदेश सरकार ने FIR दर्ज की

590 करोड़ धोखाधड़ी में IDFC First Bank का बड़ा खुलासा, प्रदेश सरकार ने FIR दर्ज की

हरियाणा सरकार से जुड़े खातों में करीब 590 करोड़ रुपये की बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद बैंकिंग और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। निजी क्षेत्र के IDFC First Bank ने आंतरिक जांच के दौरान इस संदिग्ध लेनदेन का पता लगाया और तुरंत नियामक संस्थाओं को इसकी जानकारी दी। बैंक ने मामले में पुलिस शिकायत भी दर्ज कराई है, जिसके बाद अब यह मामला औपचारिक जांच के दायरे में आ चुका है। 

जानकारी के मुताबिक, यह गड़बड़ी बैंक की चंडीगढ़ शाखा से संचालित कुछ सरकारी खातों में सामने आई। बैंक को तब शक हुआ जब खातों के बैलेंस और ट्रांजेक्शन पैटर्न में असामान्य गतिविधियां दिखीं। प्राथमिक जांच में पाया गया कि बड़ी रकम संदिग्ध तरीके से स्थानांतरित की गई है। बैंक ने इसे संभावित धोखाधड़ी मानते हुए तुरंत आंतरिक ऑडिट शुरू किया और संदिग्ध खातों को चिन्हित किया। 

IDFC First Bank ने बयान जारी कर कहा है कि यह मामला सीमित खातों तक ही सीमित है और अन्य ग्राहकों के फंड सुरक्षित हैं। बैंक ने स्पष्ट किया कि उसकी पूंजी और संचालन पर इस घटना का कोई व्यापक असर नहीं पड़ा है। हालांकि, एहतियात के तौर पर संबंधित खातों में लेनदेन पर रोक लगाई गई है और संदिग्ध रकम को ट्रैक करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने अपने चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक प्रबंधन का कहना है कि यदि किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। बैंक ने यह भी संकेत दिया है कि वह नियामक एजेंसियों और जांच अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग करेगा। 

दूसरी ओर, हरियाणा सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य के वित्त विभाग और 

संबंधित एजेंसियां बैंक के साथ समन्वय में काम कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गड़बड़ी कैसे हुई और जिम्मेदार कौन हैं। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

इस खुलासे के बाद बाजार में भी असर देखने को मिला। निवेशकों की चिंता बढ़ी और बैंक के शेयरों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी राशि की अनियमितता बैंकिंग प्रणाली के आंतरिक नियंत्रण और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े करती है। हालांकि वे यह भी कहते हैं कि अगर समय रहते गड़बड़ी का पता चल गया है और कार्रवाई शुरू हो गई है, तो इससे भविष्य में सिस्टम और मजबूत हो सकता है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी खातों में बड़े लेनदेन होने के कारण अतिरिक्त सतर्कता और मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन की जरूरत होती है। इस मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के दौर में साइबर सुरक्षा, ऑडिट सिस्टम और आंतरिक निगरानी कितनी महत्वपूर्ण है। 

फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे ट्रांजेक्शन ट्रेल को खंगाल रही हैं। यह देखा जा रहा है कि रकम किस खाते में गई, किसने अनुमोदन दिया और प्रक्रिया में कहां चूक हुई। आने वाले दिनों में और खुलासे संभव हैं। 

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