इमरान खान की आंखों की रोशनी घटी… विपक्ष दमन चर्चा तेज

Updated on 2026-02-13T15:08:02+05:30

इमरान खान की आंखों की रोशनी घटी… विपक्ष दमन चर्चा तेज

इमरान खान की आंखों की रोशनी घटी… विपक्ष दमन चर्चा तेज

 

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर गंभीर जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील ने खुलासा किया कि उनकी आंखों में खून का थक्का जम गया है, जिससे दाहिनी आंख की रोशनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। बताया गया कि उनकी दाहिनी आंख में केवल लगभग 15 प्रतिशत दृष्टि ही शेष बची है।

रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान इस समय अडियाला जेल में बंद हैं और पिछले करीब 30 महीनों से हिरासत में हैं। उन्हें सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन नाम की गंभीर आंख की बीमारी होने की बात कही गई है, जिसके कारण दृष्टि हानि बढ़ी है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक--इंसाफ का आरोप है कि जेल प्रशासन द्वारा समय पर और उचित इलाज उपलब्ध न कराए जाने से उनकी हालत और बिगड़ी है तथा स्थायी अंधेपन का खतरा पैदा हो गया है।

इस बीच इमरान खान के परिवार ने भी उनकी सेहत पर चिंता जताई है। उनकी बहन ने मीडिया के सामने उनकी हालत का जिक्र करते हुए भावुक प्रतिक्रिया दी। सूत्रों के मुताबिक जेल में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की राजनीति में विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का इतिहास भी चर्चा में आ गया है। जुल्फिकार अली भुट्टो को 1977 के सैन्य तख्तापलट के बाद गिरफ्तार किया गया और 1979 में फांसी दी गई। उनकी बेटी बेनजीर भुट्टो को भी कई बार गिरफ्तार और निर्वासित किया गया तथा 2007 में उनकी हत्या कर दी गई।

वहीं दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को 1999 में जनरल परवेज मुशर्रफ के तख्तापलट के बाद गिरफ्तार किया गया था। उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई, लेकिन बाद में समझौते के तहत निर्वासन भेज दिया गया। बाद में पनामा पेपर्स मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अयोग्य ठहराया।

परवेज मुशर्रफ को भी देशद्रोह मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी, हालांकि बाद में वे पाकिस्तान छोड़कर निर्वासन में चले गए और दुबई में उनका निधन हुआ।

 

बताया जा रहा है कि इमरान खान को 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाया गया था और 2023 से वे विभिन्न मामलों में जेल में बंद हैं। उनकी पार्टी का आरोप है कि मौजूदा राजनीतिक और न्यायिक कार्रवाइयों का इस्तेमाल विपक्ष को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।

 

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