बढ़ता कर्ज बना काल, लक्ष्मी नगर में बेटे ने परिवार खत्म किया।

Updated on 2026-01-06T13:11:27+05:30

बढ़ता कर्ज बना काल, लक्ष्मी नगर में बेटे ने परिवार खत्म किया।

बढ़ता कर्ज बना काल, लक्ष्मी नगर में बेटे ने परिवार खत्म किया।

राजधानी दिल्ली दो दिनों में हुए लगातार दो बड़े हत्याकांडों से दहशत में है। शाहदरा इलाके में बुजुर्ग दंपती की हत्या का मामला अभी सुलझा भी नहीं था कि सोमवार को पूर्वी दिल्ली के Laxmi Nagar इलाके से एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां मंगल बाजार क्षेत्र में एक युवक ने अपने ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर दी। इस ट्रिपल मर्डर के पीछे आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज को वजह बताया जा रहा है।

पुलिस का कहना हैं की, आरोपी युवक लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा था। परिवार पर कर्ज बढ़ता जा रहा था, और आमदनी के साधन सीमित थे। इसी मानसिक दबाव के चलते उसने सोमवार को अपनी मां, बहन और छोटे भाई की गला घोंटकर हत्या कर दी। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने किसी तरह से भागने की कोशिश नहीं की, बल्कि शाम करीब पांच बजे खुद ही नजदीकी थाने पहुंचकर पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस टीम आरोपी को लेकर मौके पर पहुंची। घर के अंदर का दृश्य बेहद भयावह था। तीनों शव अलग-अलग कमरों में पड़े मिले। पुलिस ने तुरंत क्राइम टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को बुलाया और घटनास्थल से सबूत जुटाए गए। शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार साधारण पृष्ठभूमि से था और काफी समय से आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहा था। आरोपी युवक पर घर चलाने की जिम्मेदारी थी, लेकिन लगातार असफलताओं और कर्ज के दबाव ने उसकी मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी किसी मानसिक बीमारी से तो ग्रस्त नहीं था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि परिवार शांत स्वभाव का था और कभी किसी से झगड़े की बात सामने नहीं आई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। पड़ोसियों को भरोसा नहीं हो रहा कि एक बेटा अपने ही परिवार के साथ ऐसा खौफनाक कदम उठा सकता है।

दिल्ली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उससे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही सभी पहलुओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

लगातार हो रही इन हत्याओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव किस हद तक इंसान को तोड़ सकते हैं। राजधानी में बढ़ते अपराध और पारिवारिक तनाव की ये घटनाएं समाज के लिए गंभीर चेतावनी हैं।