AI की रफ्तार में भारत नंबर वन, अमेरिका भी छूटा पीछे

Updated on 2026-01-12T17:49:35+05:30

AI की रफ्तार में भारत नंबर वन, अमेरिका भी छूटा पीछे

AI की रफ्तार में भारत नंबर वन, अमेरिका भी छूटा पीछे

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारत दुनिया का सबसे तेज़ी से AI अपनाने वाला देश बन गया है और इस मामले में उसने अमेरिका जैसे विकसित देशों को भी पीछे छोड़ दिया है। यह खुलासा टेक कंसल्टिंग कंपनी थॉटवर्क्स की ताजा रिपोर्ट में हुआ है, जिसमें बताया गया है कि खासतौर पर बड़े लैंग्वेज मॉडल यानी LLM के इस्तेमाल में भारत सबसे आगे निकल चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, ChatGPT, Gemini और Perplexity जैसे लोकप्रिय Al टूल्स के सबसे ज्यादा डेली और मंथली एक्टिव यूजर्स अब भारत में हैं। इसका साफ मतलब है कि AI सिर्फ कॉरपोरेट या रिसर्च लैब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। पढ़ाई, कंटेंट क्रिएशन, कोडिंग, ऑफिस वर्क और यहां तक कि छोटे बिजनेस में भी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।

भारत के AI हब बनने के पीछे सबसे बड़ी वजह सस्ता इंटरनेट और विशाल डिजिटल आबादी मानी जा रही है। BofA की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी ऑनलाइन जनसंख्या है, जहां करीब 70 से 75 करोड़ लोग मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही भारत में डेटा प्लान बेहद सस्ते हैं। महज दो डॉलर के आसपास खर्च करके यूजर्स महीने में 20 से 30GB तक डेटा इस्तेमाल कर पा रहे हैं, जो अमेरिका और यूरोप के कई देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा किफायती है।

AI अपनाने में भारत की बढ़त का दूसरा कारण युवा आबादी और टेक-फ्रेंडली माइंडसेट है। देश में बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स, स्टार्टअप फाउंडर्स और प्रोफेशनल्स AI को सीखने और अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। कॉलेजों में असाइनमेंट से लेकर ऑफिस में प्रेजेंटेशन और फ्रीलांसिंग तक, AI टूल्स को तेजी से अपनाया जा रहा है।

सरकारी स्तर पर भी डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और AI मिशन जैसी पहलें इस बदलाव को गति दे रही हैं। हेल्थकेयर, एजुकेशन, एग्रीकल्चर और गवर्नेस जैसे सेक्टर्स में AI आधारित सॉल्यूशंस पर काम तेज हुआ है। इससे न सिर्फ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ा है, बल्कि लोगों का भरोसा भी AI पर मजबूत हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ AI यूजर ही नहीं, बल्कि AI इनोवेशन और डेवलपमेंट का भी बड़ा केंद्र बन सकता है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो भारत ग्लोबल AI इकोसिस्टम में लीडिंग रोल निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।