सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान में भूखमरी की चेतावनी: सांसद अली ज़फ़र ने कहा, 'जल बम' को तुरंत निष्क्रिय करें

Updated on 2025-05-24T11:03:42+05:30

सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान में भूखमरी की चेतावनी: सांसद अली ज़फ़र ने कहा, 'जल बम' को तुरंत निष्क्रिय करें

सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले से पाकिस्तान में भूखमरी की चेतावनी: सांसद अली ज़फ़र ने कहा, 'जल बम' को तुरंत निष्क्रिय करें

23 मई 2025 को पाकिस्तान के सीनेट में विपक्षी नेता और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सांसद सैयद अली ज़फ़र ने कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करना पाकिस्तान के लिए 'जल बम' जैसा है।  उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस संकट का समाधान नहीं किया गया तो देश में भूखमरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।  उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ की सरकार से आग्रह किया कि वह इस संकट को टालने के लिए तुरंत कूटनीतिक प्रयास करें। 

भारत ने 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय लिया था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।  भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए यह कदम उठाया। 

पाकिस्तान के जल संसाधन सचिव सैयद अली मुर्तज़ा ने भारत को पत्र लिखकर इस निर्णय को 'एकतरफा और अवैध' बताया है और संधि को पुनः प्रभावी करने की अपील की है।  उन्होंने कहा कि संधि में किसी भी पक्ष को इसे निलंबित करने का अधिकार नहीं है। 

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी, जिसके तहत भारत को तीन पूर्वी नदियों—ब्यास, रावी और सतलुज—का नियंत्रण मिला, जबकि पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों—सिंधु, चेनाब और झेलम—का अधिकार प्राप्त हुआ। 

विशेषज्ञों का मानना है कि इस संधि का निलंबन पाकिस्तान के लिए गंभीर जल संकट पैदा कर सकता है, जिससे कृषि और पीने के पानी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।  पाकिस्तानी सरकार पर अब दबाव है कि वह इस संकट का समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करे।