सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की मांग—'किशोरों के लिए सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 साल की जाए'
सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की मांग—'किशोरों के लिए सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 साल की जाए'
वरिष्ठ अधिवक्ता और अमिकस क्यूरी इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है कि किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों को अपराध मानने की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव किया जाए। उन्होंने 'निपुण सक्सेना बनाम भारत सरकार' मामले में दलील देते हुए कहा कि सहमति की वैधानिक उम्र 18 से घटाकर 16 साल की जानी चाहिए।
जयसिंह ने तर्क दिया कि POCSO एक्ट और IPC की धारा 375 को 16-18 वर्ष के किशोरों पर समान रूप से लागू करना अनुचित है, क्योंकि यह स्वैच्छिक संबंधों को भी यौन शोषण मानता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कानून किशोरों की आत्मनिर्णय, परिपक्वता और निजता के अधिकार को नज़रअंदाज़ करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों और यूके के गिलिक मामले जैसे अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का हवाला दिया।
उन्होंने बताया कि 16-18 वर्ष के किशोरों से जुड़े मामलों में अभियोजन की संख्या 180% तक बढ़ गई है, जिनमें कई केस अंतरजातीय या अंतरधार्मिक रिश्तों के कारण माता-पिता की शिकायतों पर आधारित होते हैं। जयसिंह ने कोर्ट से “क्लोज-इन-एज” अपवाद की मांग की, जिससे उम्र में मामूली अंतर वाले किशोरों के बीच सहमति से बने संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जा सके, जबकि ज़बरदस्ती और शोषण के खिलाफ सुरक्षा बनी रहे।