क्या सच में Gen Z नशे से दूर जा रही है
क्या सच में Gen Z नशे से दूर जा रही है
एक समय था जब पार्टी, शराब और नाइटलाइफ को युवा पीढ़ी की पहचान माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। Gen Z यानी 1997 के बाद जन्मी पीढ़ी में शराब छोड़ने या बेहद सीमित करने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि अब कहा जाने लगा है कि इस पीढ़ी के लिए नशा नहीं, बल्कि होश ही नया स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है
कई सर्वे और रिपोर्ट्स बताते हैं कि Gen Z पहले की पीढ़ियों की तुलना में शराब कम पी रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता मानी जा रही है। यह पीढ़ी फिटनेस, मेंटल हेल्थ और बैलेंस्ड लाइफ को ज्यादा अहमियत देती है। हैंगओवर, वजन बढ़ना और फोकस बिगड़ना जैसी चीजें अब उन्हें आकर्षित नहीं करतीं।
सोशल मीडिया ने भी इस सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज की Gen Z अपनी लाइफ ऑनलाइन शेयर करती है, जहां क्लियर माइंड, प्रोडक्टिव डे और हेल्दी रूटीन को ज्यादा सराहा जाता है। शराब पीकर कंट्रोल खोने की तस्वीरें अब कूल नहीं मानी जातीं। इसके बजाय मॉर्निंग रन, जिम और मेडिटेशन जैसे ट्रेंड ज्यादा पॉपुलर हो रहे हैं।
इस बदलाव का असर शराब इंडस्ट्री पर भी साफ दिख रहा है। कई बड़ी कंपनियां अब नॉन-अल्कोहलिक बीयर, लो-अल्कोहल ड्रिंक्स और मॉकटेल्स पर फोकस कर रही हैं। बार और कैफे भी अपने मेन्यू में ऐसे विकल्प जोड़ रहे हैं, ताकि शराब न पीने वाले युवाओं को भी आकर्षित किया जा सके।
Gen Z के लिए शराब छोड़ना सिर्फ सेहत का फैसला नहीं है, बल्कि यह एक सोच है। यह पीढ़ी पैसे बचाने, करियर पर फोकस करने और खुद पर निवेश करने को ज्यादा जरूरी मानती है। महंगी शराब और पार्टी कल्चर की जगह अब ट्रैवल, स्किल्स और एक्सपीरियंस पर खर्च बढ़ रहा है।
इस बदलाव से सामाजिक माहौल भी बदल रहा है। अब दोस्ती और पार्टी का मतलब सिर्फ शराब नहीं रह गया है। कैफे मीटअप, बोर्ड गेम नाइट्स और फिटनेस एक्टिविटीज नई सोशल एक्टिविटी बन रही हैं।
कुल मिलाकर, Gen Z का शराब से दूरी बनाना सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि नई दुनिया की झलक है। यह पीढ़ी दिखा रही है कि मस्ती के लिए नशा जरूरी नहीं, बल्कि साफ दिमाग और कंट्रोल ही असली आज़ादी है।