इस बीमारी से हुई थी जिन्ना की दर्दनाक मौत, आखिरी दिनों में वजन हुआ था बेहद कम

Updated on 2025-08-14T14:04:46+05:30

इस बीमारी से हुई थी जिन्ना की दर्दनाक मौत, आखिरी दिनों में वजन हुआ था बेहद कम

इस बीमारी से हुई थी जिन्ना की दर्दनाक मौत, आखिरी दिनों में वजन हुआ था बेहद कम

अंग्रेजों ने करीब 200 साल राज करने के बाद भारत को दो हिस्सों—भारत और पाकिस्तान—में बांट दिया। पाकिस्तान 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जबकि भारत इस दिन विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मना कर बंटवारे को याद करता है। इस बंटवारे के लिए कई लोगों को जिम्मेदार माना जाता है, जिनमें मोहम्मद अली जिन्ना भी शामिल हैं।

जिन्ना को पाकिस्तान में राष्ट्रपिता कहा जाता है। लेकिन जिस मकसद से उन्होंने बंटवारा करवाया था, वह पूरा नहीं हो सका। पाकिस्तान बनने के सिर्फ एक साल बाद ही, गंभीर बीमारी टीबी (तपेदिक) के कारण उनकी दर्दनाक मौत हो गई। यह बीमारी उन्होंने सभी से छुपाकर रखी थी, यहां तक कि उनकी बहन को भी इसकी जानकारी नहीं थी

11 सितंबर 1948 को, जब उन्हें क्वेटा से कराची लाया जा रहा था, रास्ते में उनकी एम्बुलेंस का पेट्रोल खत्म हो गया। इस दौरान उनकी हालत बिगड़ गई और कराची पहुंचने के कुछ घंटों बाद उनका निधन हो गया। उनकी मौत को लेकर आज भी कई तरह के सवाल उठते हैं।

मौत के समय वजन

आधिकारिक आंकड़े नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि निधन के वक्त जिन्ना का वजन सिर्फ लगभग 36 किलो रह गया था। बीमारी और व्यस्त दिनचर्या के चलते वे इलाज पर ध्यान नहीं दे पाए।

उस समय टीबी कितनी खतरनाक थी

1940 से 1950 के दशक में टीबी दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक थी। उस समय हर साल लाखों लोग इसकी वजह से मरते थे और इसका कोई पक्का इलाज नहीं था, इसलिए इसे ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता था। भारत जैसे देशों में गरीबी, भीड़भाड़ और कुपोषण के कारण यह तेजी से फैलती थी। 1940 के शुरुआती सालों में तो इस बीमारी की कोई असरदार दवा भी मौजूद नहीं थी।