कानपुर में डीएम-सीएमओ विवाद से हाई-प्रोफाइल पॉलिटिकल टकराव
कानपुर में डीएम-सीएमओ विवाद से हाई-प्रोफाइल पॉलिटिकल टकराव
कानपुर नगर में जिलाधिकारी (डीएम) जितेंद्र प्रताप सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी के बीच तनातनी ने प्रशासन में हलचल पैदा कर दी है । विवाद की शुरुआत चार्जशीटेड कंपनी से मेडिकल सप्लाई खरीद को लेकर डीएम की आपत्ति से हुई।
डीएम का आरोप है कि संक्रमण-ग्रस्त कंपनी से स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदी गई सामग्री पारदर्शी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। इसके जवाब में सीएमओ ने अपनी कार्यशैली और निर्णयों को जायज़ ठहराया ।
मामले ने राजनीतिक डालें पकड़ी हैं—कुछ जनप्रतिनिधि डॉ. नेमी के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ डीएम के साथ खड़े होकर प्रशासनिक जवाबदेही की बात उठा रहे हैं । इससे स्वास्थ्य तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर जिला मुख्यालय में चर्चा तेज हो गई है।
इससे पहले फरवरी में भी डीएम ने अचानक सीएमओ कार्यालय का औचक निरीक्षण किया था। उस समय 101 में से 34 कर्मचारी—including सीएमओ स्वयं—अनुपस्थित पाए गए थे । उन अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोका गया था, साथ ही साफ-सफाई और नियमित उपस्थिति का सख्त निर्देश दिया गया था ।
स्थिति का संक्षेप:
चार्जशीटेड फर्म से खरीद को लेकर डीएम ने पारदर्शिता पर खड़े सवाल।
मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंचा, नेताओं की राय बंटी हुई।
चिकित्सकीय आपूर्ति की पारदर्शिता और जवाबदेही पर तीखी बहस।
पिछले औचक निरीक्षण के बाद सरकारी तंत्र को सतर्क हुए सिर्फ कुछ महीनों का समय है।
यह विवाद उपस्थिति और आपूर्ति की पारदर्शिता को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर एक गंभीर परीक्षण साबित हो सकता है। आगे क्या कदम उठाए जाते हैं—डीएम की सख्ती जारी रहती है या उच्च स्तर पर मध्यस्थता से समाधान निकाला जाता है—यह देखना होगा।