दानापुर में लालू की नई चाल या पुराना हिसाब

Updated on 2025-11-04T18:09:31+05:30

दानापुर में लालू की नई चाल या पुराना हिसाब

दानापुर में लालू की नई चाल या पुराना हिसाब

बिहार की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर है। इस बार कहानी दानापुर सीट की है, जहां लालू प्रसाद यादव खुद चुनावी मैदान में सक्रिय हो गए हैं ,  लेकिन किसी बड़े नेता के लिए नहीं, बल्कि जेल में बंद अपने करीबी रीतलाल यादव के लिए। सवाल अब यही है कि लालू यह सब अपने पुराने राजनीतिक हिसाब बराबर करने के लिए कर रहे हैं या बेटी मीसा भारती की राह आसान बनाने के लिए।

रीटलाल यादव, जो फिलहाल जेल में हैं, राजद के पुराने और प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। दानापुर में उनकी मजबूत पकड़ है और वे हमेशा से बीजेपी नेता रामकृपाल यादव के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। अब जबकि वे खुद चुनाव नहीं लड़ पा रहे, लालू ने उनकी जगह मोर्चा संभाल लिया है और पूरे जोश के साथ उनके समर्थन में प्रचार शुरू कर दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लालू का यह कदम दो मकसदों से जुड़ा है। पहला , रामकृपाल यादव से पुराना राजनीतिक बदला चुकाना, क्योंकि रामकृपाल ने कभी राजद छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था। दूसरा , अपनी बेटी मीसा भारती के पाटलिपुत्र लोकसभा क्षेत्र में राजनीतिक जमीन को मजबूत करना, जो दानापुर के आसपास ही आता है।

लालू यादव ने हाल ही में एक सभा में कहा कि “रीटलाल जनता का नेता है, उसे जेल में रखकर आवाज़ नहीं दबाई जा सकती।” उनके इस बयान के बाद राजद समर्थकों में नया जोश दिखा, जबकि बीजेपी ने इसे “भावनात्मक ड्रामा” बताया।

दानापुर की सीट इस बार सिर्फ दो दलों की नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों की राजनीति की जंग बन चुकी है , एक तरफ लालू यादव अपने पुराने संघर्षों का बदला लेना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ रामकृपाल अपनी साख बचाने में जुटे हैं।

हालात साफ हैं , दानापुर में ये चुनाव सिर्फ वोटों का नहीं, बल्कि लालू और रामकृपाल के बीच अधूरी कहानी को पूरा करने का मैदान बन चुका है।