लोकसभा से विधान परिषद तक: भारत की संसद और विधानसभाओं की पूरी समझ
लोकसभा से विधान परिषद तक: भारत की संसद और विधानसभाओं की पूरी समझ
भारत एक लोकतांत्रिक देश है, जहां जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनकर शासन व्यवस्था चलाती है। देश में कानून बनाने का काम केंद्र और राज्य —दोनों स्तरों पर होता है। केंद्र में संसद और राज्यों में विधानमंडल काम करते हैं। इन संस्थाओं को समझने के लिए लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद का अंतर जानना जरूरी है।
भारतीय संसद क्या होती है?
केंद्र सरकार की विधायिका को भारतीय संसद कहा जाता है। संसद देश की सर्वोच्च कानून बनाने वाली संस्था है। इसके तीन अंग होते हैं - राष्ट्रपति, लोकसभा और राज्यसभा संसद देश के लिए कानून बनाती है, बजट पास करती है और सरकार की जवाबदेही तय करती है।
लोकसभा क्या है?
लोकसभा संसद का निचला सदन है। इसके सदस्य सीधे जनता द्वारा चुने जाते हैं।
लोकसभा के सदस्य को सांसद (MP) कहा जाता है
हर सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीतकर आता है
लोकसभा का कार्यकाल 5 साल का होता है
केंद्र सरकार का गठन लोकसभा में बहुमत के आधार पर होता है
राज्यसभा क्या है?
राज्यसभा संसद का ऊपरी सदन है, जो राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है।
राज्यसभा के सदस्य जनता द्वारा सीधे नहीं चुने जाते
इन्हें राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित विधायक चुनते हैं
राज्यसभा स्थायी सदन है, इसे भंग नहीं किया जाता
इसके सदस्य 6 साल के लिए चुने जाते हैं
विधानसभा क्या होती है?
विधानसभा राज्य स्तर की विधायिका होती है।
विधानसभा सदस्य को विधायक (MLA) कहा जाता है
विधायक भी जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं
राज्य सरकार का गठन विधानसभा में बहुमत से होता है
मुख्यमंत्री विधानसभा का नेता होता है
विधान परिषद क्या है?
कुछ राज्यों में विधानसभा के साथ विधान परिषद भी होती है, जो ऊपरी सदन का काम करती है।
इसके सदस्य MLC कहलाते हैं
MLC अलग-अलग तरीकों से चुने जाते हैं—
कुछ विधायकों द्वारा
कुछ शिक्षक और स्नातक वर्ग द्वारा
कुछ राज्यपाल द्वारा मनोनीत
यह सदन स्थायी होता है
लोकसभा और विधानसभा जनता की सीधी भागीदारी का मंच हैं, जबकि राज्यसभा और विधान परिषद अनुभव
और संतुलन की भूमिका निभाती हैं। इन चारों संस्थाओं के माध्यम से ही भारत का लोकतंत्र सुचारु रूप से चलता है।