NEET री-एग्जाम में बड़ा बदलाव संभव, MBBS सेशन लेट होने के संकेत
NEET री-एग्जाम में बड़ा बदलाव संभव, MBBS सेशन लेट होने के संकेत
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद अब NTA पूरी परीक्षा प्रणाली बदलने की तैयारी में जुट गया है. एजेंसी NEET री-एग्जाम को हाइब्रिड मोड में कराने पर गंभीरता से विचार कर रही है, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके. हालांकि, इस बड़े बदलाव का असर लाखों छात्रों के मेडिकल सेशन पर भी पड़ सकता है.
हाइब्रिड मॉडल पर तेज मंथन
सूत्रों के मुताबिक, NTA लगातार बैठकों के जरिए नए परीक्षा मॉडल पर चर्चा कर रहा है. सबसे ज्यादा फोकस Hybrid-NEET मॉडल पर है. इस मॉडल में प्रश्नपत्र सीधे डिजिटल और एन्क्रिप्टेड फॉर्म में परीक्षा केंद्रों तक भेजे जा सकते हैं. परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही सेंटर के अंदर हाई-स्पीड प्रिंटर से पेपर निकाले जाएंगे. इससे पेपर ट्रांसपोर्टेशन के दौरान लीक होने का खतरा काफी कम हो सकता है.
CBT मॉडल भी विकल्प में
NTA कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट यानी CBT मॉडल पर भी विचार कर रहा है. हालांकि, 22 लाख से ज्यादा छात्रों के लिए इसे लागू करना आसान नहीं माना जा रहा. छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और बिजली जैसी सुविधाएं अभी भी बड़ी चुनौती हैं. इसी वजह से शुरुआत में OMR आधारित Hybrid मॉडल लागू किए जाने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है.
देरी से पिछड़ सकता है मेडिकल सेशन
री-एग्जाम की तैयारी NTA के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है. नया पेपर तैयार करने, एक्सपर्ट जुटाने, प्रिंटिंग और सुरक्षा इंतजाम में ही कई हफ्ते लग सकते हैं. माना जा रहा है कि NEET री-एग्जाम जुलाई तक जा सकता है. अगर ऐसा हुआ तो रिजल्ट अगस्त-सितंबर में आएंगे और काउंसिलिंग के बाद MBBS-BDS का नया सेशन नवंबर-दिसंबर तक खिसक सकता है.
छात्रों की बढ़ी चिंता
एक तरफ NTA सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ लाखों छात्रों की चिंता भी बढ़ गई है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर NTA री-एग्जाम कब और किस नए सिस्टम के तहत आयोजित करेगा.
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