मनरेगा की विदाई तय…
मनरेगा की विदाई तय…
केंद्र सरकार मनरेगा की जगह एक नए कानून वीबी जी राम जी बिल को लाने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि यह बिल सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था की पूरी संरचना को नए सिरे से परिभाषित करेगा। सरकार का दावा है कि मौजूदा मनरेगा योजना में कई खामियां हैं, जिनकी वजह से इसका सही लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
प्रस्तावित वीबी जी राम जी बिल में रोजगार के साथ-साथ स्किल डेवलपमेंट और टिकाऊ आजीविका पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है। मनरेगा में जहां साल में 100 दिन के काम की गारंटी है, वहीं नए बिल में काम की प्रकृति, भुगतान प्रणाली और निगरानी व्यवस्था में बदलाव की संभावना जताई जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों में सिर्फ अस्थायी मजदूरी नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले काम पैदा करने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक नए बिल में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। हाजिरी, भुगतान और काम की निगरानी पूरी तरह डिजिटल हो सकती है। इससे भ्रष्टाचार और फर्जी जॉब कार्ड जैसी समस्याओं पर लगाम लगाने की कोशिश होगी। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि डिजिटल सिस्टम से दूर-दराज के गांवों और गरीब मजदूरों को परेशानी भी हो सकती है।
मनरेगा को लेकर एक बड़ा मुद्दा मजदूरी भुगतान में देरी का रहा है। नए कानून में समय पर भुगतान को कानूनी अधिकार बनाने की चर्चा भी है। साथ ही राज्यों की भूमिका और केंद्र की जिम्मेदारी को लेकर भी नए सिरे से नियम तय किए जा सकते हैं।
फिलहाल सरकार की ओर से बिल का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इतना साफ है कि अगर यह कानून लागू होता है तो ग्रामीण रोजगार की दिशा बदल सकती है। सवाल यही है कि यह बदलाव गांव के गरीब मजदूरों के हक में होगा या उनकी अनिश्चितता और बढ़ाएगा।