नई टोल नियम: अब रफ्तार के साथ होगा टोल का हिसाब

Updated on 2025-06-12T11:28:32+05:30

नई टोल नियम: अब रफ्तार के साथ होगा टोल का हिसाब

नई टोल नियम: अब रफ्तार के साथ होगा टोल का हिसाब

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) जल्द ही एक नया टोल कलेक्शन सिस्टम शुरू करने जा रहा है, जो दूरी आधारित होगा—यानी वाहन चालकों को अब सिर्फ उस दूरी के लिए टोल देना होगा जो वे वास्‍तव में तय करते हैं, चाहे वे कुछ ही किलोमीटर सड़कों पर चलें या पूरी रेंज पार करें  । यह सिस्टम RFID‑बेस्ड FASTag के साथ ANPR कैमरों और सैटेलाइट ट्रैकिंग (GNSS) तकनीक का मिश्रित रूप होगा, जिससे ट्रैफ़िक की रफ्तार बनी रहेगी और टोल प्लाज़ा पर रुकावट कम होगी  ।

मुख्य बदलाव ये होंगे:

  • दूरी–अनुपात आधारित टोल: 100 किमी यात्रा पर लगभग ₹50 (₹0.50/किमी) मानक दर से शुल्क वसूला जाएगा 
  • ₹3,000 वार्षिक पास: नियमित यात्रियों या व्यावसायिक उपयोग के लिए एक साल में असीमित यात्रा की सुविधा मिलेगी  ।
  • बैरियर-लेस टोलिंग: फ़ास्टैग और ANPR सिस्टम के चलते टोल प्लाज़ा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी, जिससे समय-बचत और ट्रैफ़िक संदाय घटेगा  ।

लाभ क्या मिलेंगे?

  • ट्रैफ़िक जाम में कमी—गाड़ी रुके बिना टोल कटेगा।
  • स्वास्थ्य और समय की बचत—लंबे ट्रैवल में राहत।
  • पारदर्शिता—हर यात्रा की रियल-टाइम डिटेल Fastag ऐप में मिलेगी।
  • कमी डाटा गड़बड़ी की—ऑटोमैटिक सिस्टम से ट्रांजक्शन साफ होंगे  ।

टीओ‑डू सूची (वाहन मालिकों के लिए):

1. Fastag वैध रखें—₹0 बैलेंस न करें, नहीं तो पेनल्टी हो सकती है 

2. आपको GNSS उपकरण लगाना पड़ सकता है, खासकर यदि आप वार्षिक पास लेते हैं।

3. रोक-टोक (बैलेंस, पहचान जांच) से रहें जागरूक, ताकि ट्रैवल में कोई बाधा न आए।

यह नई नीति जुलाई 2025 से धीरे–धीरे देश में लागू होगी—पहले दिल्ली–NCR और एक्सप्रेसवेज़ पर, फिर विस्तार होगा अन्य राज्यमार्गों तक ।

ये बदलाव यात्रियों को न सिर्फ आर्थिक राहत देंगे, बल्कि बेहतर अनुभव भी — बिना रुकावट, पारदर्शिता और स्मार्ट ट्रैवल की दिशा में एक बड़ा कदम।