नीतीश की नई सरकार में परिवारवाद का साया जैसा कोई चुपचा मेहमान

Updated on 2025-11-20T16:24:01+05:30

नीतीश की नई सरकार में परिवारवाद का साया जैसा कोई चुपचा मेहमान

नीतीश की नई सरकार में परिवारवाद का साया जैसा कोई चुपचा मेहमान

नीतीश कुमार की १०वीं बार बन रही एनडीए कैबिनेट में सत्ता-परिवारवाद की झलक साफ नजर आ रही है। विरोधियों पर परिवारवाद का आरोप खुद सक्रिय है, और नए मंत्रिमंडल में कई ऐसे नाम शामिल हुए हैं जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि वंशवाद से जुड़ी है। 

उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है, जबकि उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी विधायक हैं,  यह सीधा सा संकेत है कि राजनीतिक विरासत को साफ नजरअंदाज नहीं किया गया है। 

बीजेपी की ओर से नितिन नबीन की नियुक्ति भी चर्चा में है,  वे पुराने भाजपाई नेता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के बेटे हैं।  वहीं श्रेयसी सिंह, जो मंत्रिमंडल में शामिल हुई हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की बेटी हैं। 

हम-दल HAM के जीतन राम मांझी की फैमिली भी इस कैबिनेट में नहीं छूटी,  उनके बेटे संतोष कुमार सुमन को फिर से मंत्री बनाया गया है। 

इसे लेकर विपक्ष, खासकर तेजस्वी यादव ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि यह सिर्फ परिवारवाद नहीं, बल्कि “जिजा-जमाई आयोग” जैसा सिस्टम बन गया है। 

दिलचस्प बात यह है कि नीतीश कुमार ने चुनावों में वंशवाद के खिलाफ खूब बात की थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद उनकी नई टीम में वही विरासत-राजनीति नजर आ रही है। 

क्या यह कैबिनेट सिर्फ अनुभव और क्षमताओं का मिश्रण है, या फिर पीढ़ियों की राजनीति का एक नया अध्याय? आने वाले समय में यह साफ होगा कि ये “परिवारवाद की शपथ” सत्ता को और मजबूत करेगा या आलोचनाओं की आग को बढ़ाएगा।