नोएडा में DM मेधा रूपम की चेतावनी, कंपनियां ब्लैकलिस्ट होंगी

Updated on 2026-04-15T13:27:49+05:30

नोएडा में DM मेधा रूपम की चेतावनी, कंपनियां ब्लैकलिस्ट होंगी

नोएडा में DM मेधा रूपम की चेतावनी, कंपनियां ब्लैकलिस्ट होंगी

नोएडा में श्रमिकों के हालिया विरोध प्रदर्शन और हिंसक घटनाओं के बाद प्रशासन ने अब कड़ा रुख अपना लिया है। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने मंगलवार देर रात औद्योगिक इकाइयों और आउटसोर्सिंग एजेंसियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें साफ संदेश दिया गया कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में श्रमिकों के वेतन, औद्योगिक शांति और आपसी समन्वय जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान डीएम ने आउटसोर्सिंग कंपनियों को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उनके अधीन काम करने वाले श्रमिक किसी भी तरह के उपद्रव या हिंसा में शामिल पाए जाते हैं, तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, उनका लाइसेंस रद्द कर उन्हें ब्लैकलिस्ट तक किया जा सकता है।

वेतन बढ़ोतरी पर प्रशासन का बड़ा दावा

 डीएम मेधा रूपम ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने श्रमिकों की वेतन वृद्धि की मांग को स्वीकार कर लिया है। इसके बाद गौतमबुद्ध नगर में श्रमिकों के न्यूनतम वेतन में संशोधन किया गया है।

नई दरों के अनुसार, अब विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों का वेतन 13,690 रुपये से बढ़ाकर 16,868 रुपये तक निर्धारित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम श्रमिकों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है।

आउटसोर्सिंग एजेंसियों पर सख्त नजर

 डीएम ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक इकाइयों और श्रमिकों के बीच जो कड़ी होती है, यानी आउटसोर्सिंग एजेंसियां, उनकी जिम्मेदारी सबसे ज्यादा है। यदि उनके किसी कर्मचारी द्वारा शांति भंग की जाती है या हिंसा की जाती है, तो सीधे एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित एजेंसी का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और उसे भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया जाएगा। यह संदेश साफ तौर पर उद्योगों और ठेकेदारों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

शांति बनाए रखने की अपील

 डीएम मेधा रूपम ने सभी श्रमिकों, उद्योगों और ठेकेदारों से अपील की कि वे जनपद में शांति और सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने कहा कि हिंसा किसी समस्या का समाधान नहीं है और किसी भी प्रकार की अराजकता पर प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी को कोई शिकायत या समस्या है, तो वह संवाद और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तलाशे। कानून को हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

प्रशासन का साफ संदेश

 कुल मिलाकर, नोएडा में हालिया घटनाओं के बाद प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड में है। एक तरफ जहां वेतन वृद्धि जैसे फैसलों से श्रमिकों को राहत देने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने के संकेत भी दिए गए हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन की इस सख्ती और चेतावनी का असर जमीनी स्तर पर कितना पड़ता है और क्या इससे औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल हो पाती है।

यह भी पढ़े 

फरीदाबाद में वेतन मांग पर प्रदर्शन, 23 लोग हिरासत में