नोएडा हंगामे में DM का वीडियो वायरल, ओवरटाइम-वीक ऑफ ऐलान

Updated on 2026-04-13T13:38:39+05:30

नोएडा हंगामे में DM का वीडियो वायरल, ओवरटाइम-वीक ऑफ ऐलान

नोएडा हंगामे में DM का वीडियो वायरल, ओवरटाइम-वीक ऑफ ऐलान

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर में श्रमिक आंदोलन के बीच जिलाधिकारी मेधा रूपम का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। 12 अप्रैल को जारी इस वीडियो में डीएम ने श्रमिकों के लिए कई अहम घोषणाएं कीं, जिससे बढ़ते तनाव के बीच हालात संभालने की कोशिश साफ दिख रही है।

वीडियो में डीएम मेधा रूपम ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों में औद्योगिक इकाइयों के साथ विस्तृत बैठकें की गई हैं और श्रमिकों के हित में कई जरूरी निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब ओवरटाइम करने वाले श्रमिकों को दोगुनी दर से मजदूरी दी जाएगी, जिससे उनके अधिकारों की बेहतर सुरक्षा हो सके।

इसके साथ ही डीएम ने साप्ताहिक अवकाश को लेकर भी बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि हर श्रमिक को वीक ऑफ यानी साप्ताहिक छुट्टी देना अनिवार्य होगा। अगर किसी श्रमिक से उस दिन भी काम कराया जाता है, तो उसे उस दिन के लिए भी दोगुनी मजदूरी दी जाएगी।

इतना ही नहीं, डीएम ने बोनस को लेकर भी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि सभी श्रमिकों को नियमों के तहत बोनस दिया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 30 नवंबर से पहले यह राशि सीधे उनके बैंक खातों में पहुंच जाए।

इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री नरेंद्र कश्यप का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है और श्रमिकों की समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री खुद इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं और जल्द समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं।

नरेंद्र कश्यप ने श्रमिकों से अपील की कि वे आंदोलन के बजाय संवाद का रास्ता अपनाएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार किसी के साथ अन्याय नहीं होने देगी और सभी को न्याय मिलेगा।

मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि हालात बिगाड़ने के पीछे कुछ असामाजिक या राजनीतिक तत्वों का हाथ हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले 48 घंटों से शांतिपूर्ण चल रहा प्रदर्शन अचानक हिंसक हो जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि किसी ने माहौल को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की है।

कुल मिलाकर, नोएडा में जारी श्रमिक आंदोलन के बीच प्रशासन और सरकार दोनों ही हालात को काबू में लाने और श्रमिकों की मांगों को पूरा करने की दिशा में सक्रिय नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि ये घोषणाएं जमीन पर कितनी जल्दी लागू होती हैं और इससे तनाव कम होता है या नहीं।

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