पुतिन का 'समंदर राक्षस' पोसीडन, दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा

Updated on 2026-01-16T17:38:34+05:30

पुतिन का 'समंदर राक्षस' पोसीडन, दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा

पुतिन का 'समंदर राक्षस' पोसीडन, दुनिया पर मंडराया विनाश का खतरा

दुनिया में हथियारों की होड़ के बीच रूस ने एक ऐसा खतरनाक हथियार विकसित कर लिया है, जिसने वैश्विक सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इस हथियार का नाम पोसीडन न्यूक्लियर ड्रोन है, जिसे 'समंदर का राक्षस' और 'डूम्सडे वेपन' भी कहा जा रहा है। यह हथियार पारंपरिक मिसाइलों से बिल्कुल अलग है और समुद्र के भीतर से बड़े पैमाने पर तबाही मचाने की क्षमता रखता है।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई बार इस हथियार की ताकत का जिक्र कर चुके हैं। उनके अनुसार पोसीडन ऐसा सिस्टम है, जिसे मौजूदा मिसाइल डिफेंस या सोनार तकनीक से न तो आसानी से ट्रैक किया जा सकता है और न ही रोका जा सकता है। यही वजह है कि इसे रूस की रणनीतिक सुरक्षा का सबसे घातक हथियार माना जा रहा है।

पोसीडन दरअसल परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एक मानव रहित अंडरवॉटर ड्रोन है। इसे विशेष रूप से डिजाइन की गई पनडुब्बियों से लॉन्च किया जाता है। इसकी रेंज हजारों किलोमीटर तक बताई जाती है और यह समुद्र की गहराइयों में बेहद तेज रफ्तार से सफर कर सकता है। सबसे खतरनाक बात यह है कि यह बहुत कम शोर करता है, जिससे दुश्मन देशों के सोनार सिस्टम के लिए इसे पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, अगर पोसीडन को किसी दुश्मन देश के तटीय इलाके के पास विस्फोटित किया

जाए, तो यह रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है। इस विस्फोट से उठने वाली समुद्री लहरें तटीय शहरों, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर सकती हैं। इतना ही नहीं, समुद्री पानी में फैलने वाला रेडिएशन उस क्षेत्र को लंबे समय तक रहने लायक नहीं छोड़ेगा।

रूस का दावा है कि पोसीडन किसी भी आधुनिक नेवी डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है। यही कारण है कि अमेरिका और नाटो देशों में इसे लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हथियार पारंपरिक युद्ध की परिभाषा को बदल सकते हैं और परमाणु संतुलन को और ज्यादा खतरनाक बना सकते हैं।

 

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे हथियारों को लेकर नैतिक और कानूनी सवाल भी उठ रहे हैं। कई रक्षा विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर भविष्य में इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल हुआ, तो उसका असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी मानवता को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।