CBSE फीस विवाद पर राहुल गांधी का हमला, सरकार घिरी

Updated on 2026-06-01T13:00:30+05:30

CBSE फीस विवाद पर राहुल गांधी का हमला, सरकार घिरी

CBSE फीस विवाद पर राहुल गांधी का हमला, सरकार घिरी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने CBSE की उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग और पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि बोर्ड की गलतियों का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है और अपनी ही कॉपी की सही जांच करवाने के लिए विद्यार्थियों से भारी फीस वसूली जा रही है।

'CBSE की गलती, सजा छात्रों को'

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, "जेबकतरों से सावधान, आज वे CBSE के अंदर बैठे हैं।" उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी छात्र के अंक बोर्ड की गलती से कम आ जाएं, तो उसे सुधारने के लिए भी छात्रों को पैसे क्यों देने पड़ते हैं।

राहुल गांधी के मुताबिक, डिजिटल स्कैन कॉपी प्राप्त करने के लिए प्रति विषय 100 रुपये, री-टोटलिंग के लिए 100 रुपये प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन के लिए 25 रुपये प्रति प्रश्न शुल्क लिया जाता है। उनका दावा है कि कई मामलों में एक छात्र को अपनी उत्तर पुस्तिका की दोबारा जांच करवाने के लिए करीब 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं।

'4 लाख आवेदन आए, कितनी कमाई हुई होगी?'

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि जब लाखों छात्र पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका जांच के लिए आवेदन करते हैं, तो इससे होने वाली आय पर भी सवाल उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि लगभग 4 लाख छात्रों ने आवेदन किया है, तो यह जानना जरूरी है कि इस प्रक्रिया से कितनी राशि एकत्र हुई होगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और यदि स्कैनिंग की गुणवत्ता कमजोर हो, तो गलत मूल्यांकन की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में छात्रों को अपनी ही कॉपी की त्रुटियां सुधारने के लिए भुगतान करना पड़ता है।

शिक्षा को सेवा नहीं, कारोबार बनाने का आरोप

राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर देना होना चाहिए, लेकिन जब शिक्षा को सेवा के बजाय कारोबार बना दिया जाता है, तो गलतियों को सुधारने के बजाय उनसे कमाई की जाती है।

उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ता है, क्योंकि इससे उनका समय, आत्मविश्वास और भविष्य प्रभावित होता है।

वायरल पोस्ट के जरिए उठाए सवाल

इससे पहले राहुल गांधी ने एक सोशल मीडिया यूजर की पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए भी इस मुद्दे को उठाया था। वायरल पोस्ट में कुछ उत्तर पुस्तिकाओं की तस्वीरें साझा की गई थीं, जिनकी स्कैनिंग गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे।

पोस्ट में पूछा गया था कि यदि बोर्ड ने उच्च गुणवत्ता वाले स्कैनर इस्तेमाल किए थे, तो उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल कॉपियां इतनी धुंधली और खराब स्थिति में क्यों दिखाई दे रही हैं।

टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

राहुल गांधी ने दावा किया कि मई 2025 में जारी टेंडर में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग ऑटोमैटिक रोबोटिक स्कैनर से करने और न्यूनतम 300 DPI रेजोल्यूशन बनाए रखने की शर्त रखी गई थी।

लेकिन उनके अनुसार बाद में जारी संशोधित टेंडर में इन शर्तों को बदल दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कैनिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी शर्तों को हटाया गया और रेजोल्यूशन भी कम कर दिया गया।

मोबाइल फोन से स्कैनिंग का दावा

राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग कथित तौर पर मोबाइल फोन के जरिए की गई थी। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है, ताकि छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

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