ढाका में रैलियों और प्रदर्शन पर प्रतिबंध, मोहम्मद यूनुस सरकार का कड़ा रुख

Updated on 2025-06-10T10:49:58+05:30

ढाका में रैलियों और प्रदर्शन पर प्रतिबंध, मोहम्मद यूनुस सरकार का कड़ा रुख

ढाका में रैलियों और प्रदर्शन पर प्रतिबंध, मोहम्मद यूनुस सरकार का कड़ा रुख

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार, जिसका नेतृत्व नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस कर रहे हैं, ने ढाका में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों—जैसे सचिवालय, जमुना के पास और सुप्रीम कोर्ट के आसपास—में रैलियों, जुलूसों और सार्वजनिक प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया है  । ढाका पुलिस (DMP) के इस आदेश को 1976 के डाक्टरेट कानून की धारा 29 के आधार पर लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य “जनशांति और सार्वजनिक सुरक्षा” बनाए रखना बताया गया है  ।

साथ ही, यूनुस के घर और कार्यालय की सुरक्षा बढ़ा दी गई, उनके घर के आसपास सड़कें बंद कर दी गईं—ऐसे में उनके सत्ता के प्रति बढ़ते रुख को लोगों पर कड़ा संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि सरकार ने इन उपायों की नौतिकता और आवश्यकता की बात कही, विपक्षी दलों एवं मानवाधिकार समूहों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया। आम लोग, सरकारी कर्मचारी और शिक्षक भी विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा बन रहे हैं—उनमें से कई सरकारी कर्मचारियों ने यूनुस की ‘सेवा सुधार’ योजना के विरोध में प्रदर्शन किया, जिसे वे ‘काले कानून’ कह रहे हैं  । इन्हें रद्द करने की मांग तेज है  ।

सेना की स्पेशल यूनिटों—रैब, बीजीबी, SWAT—को भी महत्वपूर्ण भवनों पर तैनात किया गया है, जिससे ढाका की तनावपूर्ण स्थिति और बढ़ी हुई सुरक्षा का संकेत मिलता है  ।

मोहम्मद यूनुस के करीबी सहयोगियों ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि “मानवाधिकार संगठनों की आवाज उठना अच्छा है, लेकिन कानून लागू है और इसे सुनिश्चित करना ज़रूरी है”  ।

ढाका की सड़कों पर सख्ती का असर यह बताता है कि यूनुस सरकार देश में राजनीतिक गतिरोध को प्राथमिकता के तौर पर खत्म करने पर तुलेगी—लेकिन यह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राज्य की संतुलन-स्थिति पर बड़े प्रश्न भी खड़े करता है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर यह देखना होगा कि क्या यूनुस का अगला कदम न्यायपालिका और चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करेगा या लोकतंत्र के लिए और बाधा बनेगा।