डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93 पार, आम आदमी पर पड़ा करंसी का असर

Updated on 2026-03-20T13:16:21+05:30

डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93 पार, आम आदमी पर पड़ा करंसी का असर

डॉलर के मुकाबले रुपया पहली बार 93 पार, आम आदमी पर पड़ा करंसी का असर

शुक्रवार को भले ही शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली, लेकिन करेंसी मार्केट में रुपया दबाव में रहा। डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया पहली बार 93 के पार पहुंच गया, जो एक रिकॉर्ड स्तर है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली इसकी बड़ी वजह है। 

रुपये में गिरावट का आम लोगों पर असर

रुपए में कमजोरी का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है। आयातित सामान महंगे हो सकते हैं, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। विदेश में पढ़ाई, यात्रा और अन्य खर्च भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

पहली बार 93 के पार पहुंचा रुपया

इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.92 पर खुला और जल्द ही गिरकर 93.08 के स्तर तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव से 19 पैसे कमजोर था। इससे पहले बुधवार को रुपया 92.89 पर बंद हुआ था, जो उस समय तक का रिकॉर्ड निचला स्तर था। गुरुवार को गुड़ी पड़वा के कारण फॉरेक्स बाजार बंद रहे।

गिरावट की मुख्य वजहें

फॉरेक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से रुपये पर दबाव बढ़ा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भी एक बड़ा कारण है। Finrex Treasury Advisors LLP के अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, इस समय RBI डॉलर बेचकर रुपये को ज्यादा गिरने से रोकने की कोशिश कर रहा है।

डॉलर इंडेक्स और कच्चे तेल का असर

डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.25 पर पहुंच गया है, जो डॉलर की मजबूती दिखाता है। वहीं ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव जारी है और हाल ही में यह 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा था। इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।

शेयर बाजार में सुधार, लेकिन दबाव बरकरार

घरेलू शेयर बाजार में रिकवरी देखी गई। सेंसेक्स करीब 960 अंक चढ़कर 75,167 पर पहुंचा, जबकि निफ्टी 23,313 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। इसके बावजूद विदेशी निवेशकों ने 7,500 करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की।

आगे क्या हैं संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में जल्द राहत की संभावना कम है। मार्च में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 8 अरब डॉलर से ज्यादा निकाले हैं। लगातार बढ़ती ऊर्जा कीमतें और वैश्विक अनिश्चितता आने वाले समय में रुपये और अर्थव्यवस्था दोनों पर दबाव बनाए रख सकती हैं।

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