शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: बिहार में किसकी सियासत डगमगाएगी?

Updated on 2025-09-22T11:37:01+05:30

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: बिहार में किसकी सियासत डगमगाएगी?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद: बिहार में किसकी सियासत डगमगाएगी?

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बिहार विधानसभा चुनाव में हर सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है, जिससे बिहार की सियासत में हलचल मच गई है। पहले ही प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी के चुनाव में उतरने से चुनाव दिलचस्प होने की बात कही जा रही थी, अब शंकराचार्य के ऐलान ने सभी दलों की टेंशन बढ़ा दी है।

अविमुक्तेश्वरानंद इस समय बिहार में “गौ मतदाता संकल्प यात्रा” निकाल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल गौ रक्षा के लिए सच में प्रतिबद्ध नहीं है, इसलिए हर विधानसभा क्षेत्र में गौरक्षक उम्मीदवार मैदान में उतारेंगे। अब सवाल उठ रहा है कि इनके चुनाव में उतरने से किस पार्टी को नुकसान होगा।

आज नहीं तो कल बनेगी गौ भक्तों की सरकार:

शंकराचार्य ने कहा कि आजादी की लड़ाई में उन्होंने इसलिए हिस्सा लिया कि कहा गया था गौहत्या पर रोक लगेगी, लेकिन 80 साल बाद भी यह नहीं हुआ। उनका कहना है कि घर में पहली रोटी गाय के लिए बनती है, इसलिए वोट भी गौ रक्षा के लिए देना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश गौ भक्तों का है, इसलिए भविष्य में गौ भक्तों की सरकार बनेगी।

सनातनी विचारधारा की अहमियत:

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि देश में 80 करोड़ सनातनी हैं, लेकिन उनकी विचारधारा की राजनीति को कोई महत्व नहीं देता। रूस, चीन और अमेरिका की विचारधारा तो चल रही है, लेकिन सनातनी राजनीति की शुरुआत जरूरी है।

किसको नुकसान होगा?

शंकराचार्य ने कहा कि वे सभी 243 सीटों पर गौरक्षकों को उम्मीदवार बनाएंगे, लेकिन नामांकन के बाद ही नाम तय होंगे। माना जा रहा है कि उनके उम्मीदवार एनडीए, खासकर बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे पर मुखर रहती है। हालांकि सीमांचल इलाके में वोटिंग का ध्रुवीकरण होने की वजह से यह महागठबंधन के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है।