बांग्लादेश चुनाव को शेख हसीना ने बताया अवैध उठाईं छह मांग

Updated on 2026-02-13T15:01:07+05:30

बांग्लादेश चुनाव को शेख हसीना ने बताया अवैध उठाईं छह मांग

बांग्लादेश चुनाव को शेख हसीना ने बताया अवैध उठाईं छह मांग

बांग्लादेश में हालिया संसदीय चुनाव को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने चुनाव प्रक्रिया को फर्जी, अवैध और असंवैधानिक करार देते हुए इसके परिणामों को मानने से इनकार कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने कहा कि अंतरिम प्रशासन के तहत कराया गया यह चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और जनता के मतदान अधिकारों की अनदेखी करता है।बताया जा रहा है कि यह चुनाव उस अंतरिम सरकार को बदलने के लिए कराया गया, जिसने अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद सत्ता संभाली थी। 13वें संसदीय चुनाव के तहत 300 में से 299 सीटों पर मतदान कराया गया, जबकि एक सीट पर उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव स्थगित रहा। मतदान के साथ 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी कराया गया।

शेख हसीना ने अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि यूनुस ने गैरकानूनी और असंवैधानिक तरीके से सत्ता हथियाई और चुनाव को योजनाबद्ध तरीके से प्रभावित किया। उन्होंने दावा किया कि अवामी लीग को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखकर मतदान कराया गया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने मतदान के दौरान व्यापक अनियमितताओं के आरोप भी लगाए। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि मतदान से पहले ही कई केंद्रों पर कब्जा, गोलीबारी, धन वितरण, बैलेट पेपर पर जबरन मुहर लगवाने और एजेंटों से परिणाम पत्रों पर हस्ताक्षर कराने जैसी घटनाएं हुईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई मतदान केंद्रों पर मतदाता संख्या बेहद कम रही।

इस बीच शेख हसीना ने चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि सुबह 11 बजे तक मतदान प्रतिशत केवल 14.96 रहा, जो चुनाव बहिष्कार का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवामी लीग समर्थकों, अल्पसंख्यकों और मतदाताओं को डराया-धमकाया गया और गिरफ्तारियां भी हुईं।

अपने बयान में शेख हसीना ने छह प्रमुख मांगें रखीं। इनमें चुनाव रद्द करने, मोहम्मद यूनुस के इस्तीफे, राजनीतिक बंदियों की रिहाई, शिक्षकों-पत्रकारों सहित पेशेवरों की रिहाई, अवामी लीग पर प्रतिबंध हटाने और तटस्थ कार्यवाहक सरकार के तहत निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग शामिल है।

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