बिना वजह पुलिसकर्मी का थप्पड़ या मारपीट है अपराध, BNS धारा 111 में सजा का प्रावधान

Updated on 2025-08-18T16:03:12+05:30

बिना वजह पुलिसकर्मी का थप्पड़ या मारपीट है अपराध, BNS धारा 111 में सजा का प्रावधान

बिना वजह पुलिसकर्मी का थप्पड़ या मारपीट है अपराध, BNS धारा 111 में सजा का प्रावधान

किसी भी पुलिसकर्मी को बिना कारण किसी नागरिक को थप्पड़ मारने या मारपीट करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना न केवल कदाचार माना जाता है बल्कि यह अपराध भी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम एक साल की जेल या ₹10,000 का जुर्माना हो सकता है। कानून की नजर में आम नागरिक और वर्दीधारी अधिकारी, दोनों समान हैं।

अगर आपके साथ ऐसी घटना होती है तो सबसे पहला कदम नजदीकी थाने में एफआईआर दर्ज कराना होना चाहिए। तुरंत मदद के लिए 100 या 112 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं। ये कॉल रिकॉर्ड होते हैं और अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

यदि स्थानीय पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दे तो मामला जिले के एसपी, पुलिस आयुक्त या डीजीपी तक ले जाएं। इसके अलावा मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा भी खटखटाया जा सकता है। और अगर तब भी न्याय न मिले तो अदालत में याचिका दायर करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

किसी भी पुलिसकर्मी को बिना कारण किसी नागरिक को थप्पड़ मारने या मारपीट करने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना न केवल कदाचार माना जाता है बल्कि यह अपराध भी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत इस अपराध के लिए अधिकतम एक साल की जेल या ₹10,000 का जुर्माना हो सकता है। कानून की नजर में आम नागरिक और वर्दीधारी अधिकारी, दोनों समान हैं।

अगर आपके साथ ऐसी घटना होती है तो सबसे पहला कदम नजदीकी थाने में एफआईआर दर्ज कराना होना चाहिए। तुरंत मदद के लिए 100 या 112 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं। ये कॉल रिकॉर्ड होते हैं और अदालत में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

यदि स्थानीय पुलिस आपकी एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दे तो मामला जिले के एसपी, पुलिस आयुक्त या डीजीपी तक ले जाएं। इसके अलावा मानवाधिकार आयोग का दरवाज़ा भी खटखटाया जा सकता है। और अगर तब भी न्याय न मिले तो अदालत में याचिका दायर करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।