इंफोसिस के ऑफिस बॉय की कहानी जिसने मेहनत से CEO बनने तक का सफर तय किया
इंफोसिस के ऑफिस बॉय की कहानी जिसने मेहनत से CEO बनने तक का सफर तय किया
कहते हैं, अगर हौसला बुलंद हो तो मंज़िल चाहे कितनी भी दूर क्यों न हो, उसे पाया जा सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक कहानी है दादासाहेब भगत की , एक ऐसे शख्स की, जिसने इंफोसिस में ऑफिस बॉय के तौर पर काम शुरू किया और अब खुद एक कंपनी के CEO बन चुके हैं।
दादासाहेब भगत महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव से आते हैं। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, लेकिन सपने बड़े थे। उन्होंने कभी हार नहीं मानी। इंफोसिस में नौकरी उन्हें चाय-पानी और दस्तावेज़ पहुंचाने जैसे कामों के लिए मिली थी। लेकिन दादासाहेब ने उस माहौल को सीखने के मौके के रूप में अपनाया। वे हर दिन कुछ नया समझने की कोशिश करते रहे — कैसे मीटिंग होती है, कैसे प्रेजेंटेशन बनाई जाती है और कैसे बड़े लोग निर्णय लेते हैं।
धीरे-धीरे उन्होंने खुद पढ़ाई जारी रखी, कंप्यूटर और बिजनेस मैनेजमेंट की समझ विकसित की। इंफोसिस में उनके समर्पण और ईमानदारी ने सभी को प्रभावित किया। उन्होंने अपनी बचत और सीखी हुई चीज़ों से आगे चलकर खुद की कंपनी शुरू की, जो आज एक सफल IT फर्म बन चुकी है।
दादासाहेब भगत की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की जीत है जो कहती है — "शुरुआत चाहे नीचे से हो, लेकिन नज़र हमेशा ऊपर रखनी चाहिए।"
आज वे युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता इस बात का सबूत है कि अगर मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी पोज़िशन हासिल करना नामुमकिन नहीं।
दादासाहेब का कहना है, “मैंने कभी अपनी शुरुआत को शर्मिंदगी नहीं समझा, बल्कि उसी ने मुझे ऊंचाइयों तक पहुंचाया।”
वाकई, उनका सफर बताता है कि असली सफलता वही है जो संघर्ष की आग में तपकर निकलती है।