सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार की Z+ सुरक्षा बरकरार रखने की याचिका खारिज की

Updated on 2025-06-14T10:26:22+05:30

सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार की Z+ सुरक्षा बरकरार रखने की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार की Z+ सुरक्षा बरकरार रखने की याचिका खारिज की

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट कह दिया कि उद्योगपति मुकेश अंबानी और उनके परिवार को दी गई Z+ सुरक्षा का निर्णय राज्य सरकारों के विभाय­ज्ञ स्तर के मूल्यांकन पर आधारित है और इसका न्यायालय द्वारा पुनः निरुपण नहीं किया जा सकता  ।

याचिकाकर्ता बिकाश साहा ने Z+ सुरक्षा को हटाने या समीक्षा करने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य—केंद्र व महाराष्ट्र सरकार—खतरे की वास्तविकता की समीक्षा कर सुरक्षा स्तर तय करें, और इसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप उचित नहीं  ।

न्यायमूर्ति मन्मोहन की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता को चेतावनी दी कि भविष्य में ऐसी फंसावट याचिकाएं दायर करने पर “उल्लेखनीय आर्थिक जुर्माना” लगाया जा सकता है  । कोर्ट ने यह भी कहा कि साहा ने कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया जो सुरक्षा आवे­की तर्कसंगतता पर सवाल उठाता हो  

मुख्य बिंदु:

  • Z+ सुरक्षा की समीक्षा सरकारों की जिम्मेदारी; न्यायालय इसका निर्धारण नहीं करेगा।
  • याचिकाकर्ता पर भविष्य में अतिरिक्त दंड लगने की चेतावनी जारी।
  • फरवरी 2023 में ही सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार को यह सुरक्षा मंज़ूर की थी, जिसमें खर्चा स्वयं अम्बानी को वहन करना था  ।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च सुरक्षा कवरेज की आवश्यकता—चाहे राजनीतिक व्यक्ति हो या कारोबार से जुड़े प्रमुख—खतरे के आधार पर राज्य व केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है और न्यायपालिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने अम्बानी परिवार की Z+ सुरक्षा की वैधानिकता को पुन: पुष्ट किया और कहा कि ऐसी रिक्त्ताएं बिना ठोस कारण पर पुनर्विचार योग्य नहीं हैं।