ऋग्वेद और प्राचीन मध्य-पूर्वी भजन में मिला संगीत का अनोखा संबंध

Updated on 2025-08-20T15:46:35+05:30

ऋग्वेद और प्राचीन मध्य-पूर्वी भजन में मिला संगीत का अनोखा संबंध

ऋग्वेद और प्राचीन मध्य-पूर्वी भजन में मिला संगीत का अनोखा संबंध

हाल ही में किए गए एक अध्ययन ने खुलासा किया है कि हजारों साल और हजारों मील की दूरी से अलग संस्कृतियों में संगीत का गहरा संबंध मौजूद था। शोधकर्ताओं ने पाया कि भूमध्यसागर तट पर स्थित प्राचीन शहर उगारित से मिले 3,000 साल पुराने "हिम्न टू निक्कल" और भारत के ऋग्वेद में लय और ताल का चौंकाने वाला साम्य है।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा के शोधकर्ता डैन सी. बकियु की टीम ने बताया कि ऋग्वेद के करीब हर पांच में से एक श्लोक का अंत उन्हीं लयबद्ध इकाइयों से होता है, जो हिम्न टू निक्कल में मिलती हैं। कंप्यूटर-आधारित विश्लेषण ने साबित किया कि यह समानता महज संयोग नहीं है, इसकी संभावना दस लाख में एक से भी कम है।

ऋग्वेद और हिम्न टू निक्कल दोनों ही Bronze Age की रचनाएं हैं और मौखिक परंपरा के जरिए पीढ़ियों तक संरक्षित की गई थीं। अध्ययन में सामने आया कि दोनों में केवल लय ही नहीं, बल्कि धुन और प्रस्तुति शैली भी समान है। खासतौर पर “कैडेंस”—यानी पदांत पर बार-बार दोहराए जाने वाले लयबद्ध और संगीतमय पैटर्न—दोनों रचनाओं में एक जैसे दिखाई देते हैं।

यह खोज इस बात का प्रमाण मानी जा रही है कि ब्रॉन्ज एज में संगीत एक वैश्विक सांस्कृतिक धारा के रूप में मौजूद था, जिसने अलग-अलग सभ्यताओं को एक अदृश्य तार से जोड़े रखा।