अमेरिका रूस परमाणु संधि समाप्ति से वैश्विक सुरक्षा चिंता बढ़ी
अमेरिका रूस परमाणु संधि समाप्ति से वैश्विक सुरक्षा चिंता बढ़ी
अमेरिका और रूस के बीच सामरिक परमाणु हथियारों को सीमित करने वाली प्रमुख संधि के समाप्त होने की संभावना ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर नई चिंता खड़ी कर दी है। यह संधि, जिसे सामरिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी START ढांचे के तहत लागू किया गया था, दोनों देशों के परमाणु शस्त्रागार पर नियंत्रण का अहम आधार मानी जाती रही है। अब इसके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार संधि की अवधि समाप्ति के नजदीक है और इसके विस्तार या नवीनीकरण पर सहमति बनती नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संधि बिना नवीनीकरण के समाप्त होती है तो परमाणु हथियारों की तैनाती, आधुनिकीकरण और संख्या को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे शीत युद्ध जैसी रणनीतिक होड़ की आशंका फिर उभरने लगी है।
बताया जा रहा है कि START व्यवस्था के तहत दोनों देशों पर तैनात परमाणु वारहेड्स और डिलीवरी सिस्टम की संख्या को लेकर सीमा तय की गई थी। साथ ही निरीक्षण और पारदर्शिता से जुड़े प्रावधान भी शामिल थे, जिससे आपसी विश्वास बनाए रखने में मदद मिलती थी। संधि समाप्त होने की स्थिति में ये निगरानी तंत्र भी कमजोर पड़ सकते हैं।
वहीं दूसरी ओर अमेरिका और रूस के बीच मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ने वार्ता की संभावनाओं को प्रभावित किया है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कूटनीतिक स्तर पर संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन प्रगति सीमित रही है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वैश्विक शक्तियां नए हथियार नियंत्रण ढांचे पर सहमत हो पाएंगी।
इस बीच यूरोपीय देशों और सुरक्षा विश्लेषकों ने चिंता जताई है कि परमाणु संतुलन में अस्थिरता का असर वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर पड़ सकता है। एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भी सुरक्षा समीकरण प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि आने वाले महीनों में संधि के भविष्य पर निर्णायक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल हथियार नियंत्रण व्यवस्था को बनाए रखने और नई वार्ता संभावनाओं को तलाशने पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
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